_ap_ufes{"success":true,"siteUrl":"wahgazab.com","urls":{"Home":"http://wahgazab.com","Category":"http://wahgazab.com/category/uncategorized/","Archive":"http://wahgazab.com/2018/01/","Post":"http://wahgazab.com/cobra-hid-in-boots-people-got-frightened/","Page":"http://wahgazab.com/aadhaar/","Attachment":"http://wahgazab.com/?attachment_id=45050","Nav_menu_item":"http://wahgazab.com/37779/","Custom_css":"http://wahgazab.com/flex-mag/","Wpcf7_contact_form":"http://wahgazab.com/?post_type=wpcf7_contact_form&p=38240","Mt_pp":"http://wahgazab.com/?mt_pp=14714"}}_ap_ufee

भगवान हनुमान के इस मंदिर में मिलता हैं साक्षात उनका आशीर्वाद, जानिये इस मंदिर के बारे में

भगवान हनुमान

 

भारत देश में बहुत से मंदिर ऐसे हैं जहां सैंकड़ो लोग भगवान के दर्शनों हेतु जाते हैं। मगर देश में एक मंदिर ऐसा भी हैं जहां भक्त एक बंदर का आशीर्वाद लेने आते हैं। जी हां, आज हम आपको उस मंदिर के बारे में बता रहें हैं जहां पर एक बंदर मंदिर में आने वाले भक्तों को आशीर्वाद देता हैं। आपको बता दें कि यह मंदिर राजस्थान प्रदेश में हैं। इस मंदिर को बजरंगगढ़ का हनुमान मंदिर कहा जाता हैं। यहां पर बहुत से भक्त भगवान हनुमान के दर्शन करने आते हैं।

मंगलवार तथा शनिवार को इस मंदिर में भक्तों की भीड़ लगी रहती हैं। इस मंदिर में आने वाले लोगों को न सिर्फ भगवान हनुमान का आशीर्वाद मिलता हैं बल्कि वे इस मंदिर के परिसर से दौलतबाग, अजमेर शहर तथा आनासागर के सुंदर द्रश्य को साफ़ देख कर प्रफुल्लित भी होते हैं।

बंदर हैं इस मंदिर का सेवादार –

भगवान हनुमानImage Source:

इस मंदिर की प्रतिमा बेहद ख़ास हैं। असल में इस मंदिर की प्रतिमा का मुंह खुला हुआ हैं इसलिए यहां पर भक्तों द्वारा चढ़ाया गया प्रसाद सीधे भगवान हनुमान के मुख में पहुँचता हैं। इस मंदिर का एक मुख्य आकर्षण यहां का सेवादार बंदर भी हैं। यह बंदर पिछले कई वर्षों से भगवान हनुमान की सेवा कर रहा हैं। इसका नाम “रामू” हैं। यह बंदर प्रतिदिन मंदिर की प्रतिमा के पैर धुलवाता हैं तथा तिलक आदि करता हैं। इसके अलावा यह बंदर मंदिर में आने वाले भक्तों को अपना आशीर्वाद भी देता हैं।

रामू नामक इस बंदर के बारे में हनुमान मंदिर के चौकीदार ओंकार सिंह बताते हैं कि यह बंदर किसी मदारी से 7 वर्ष पहले छूट गया था और यहां आ पंहुचा। तब यह काफी बीमार था। मंदिर में ही इसकी सेवा की गई और यह जब सही हो गया तो यहीं पर रहने लगा और मंदिर के कार्य में अपना योगदान करने लगा। इस प्रकार से यह बंदर अब मंदिर में आने वाले भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ हैं।

Most Popular

To Top