पिता ने 8 माह की बेटी से बलात्कार करने वाले के काटे हाथ

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आज समाज में बेटियों की सुरक्षा व उनके उत्थान के लिये नेता से लेकर मंत्री तक बड़े-बड़े भाषण देते हैं, सरकार की तरफ से भी काफी प्रयास किए जा रहे ताकि हर लड़कियों का सही विकास हो सके। वो पढ़ लिख कर आगे बढ़े सकें, पर क्या मां की कोख से बचाये जाने के बाद हमारी बेटियां सुरक्षित हैं? इस प्रकार के सवाल आज समाज के हर लोगों से किये जा रहे हैं कि आखिर किस प्रकार से हम अपनी बेटी को सुरक्षित कर सकते हैं। आज हालात यहां तक बिगड़ चुके हैं कि दुधमुंही बच्चियों को भी बाहर घूम रहे दरिंदे नहीं छोड़ रहे। जिन बच्चियों ने अभी अपने मां के आंचल को भी नहीं पहचाना, गदंगी के आगोश में समाए भेड़िये अपनी शारीरिक प्यास बुझाने के लिए उन्हें भी नहीं बख्शते हैं।

आज हम आपको इसी प्रकार से घटित एक घटना के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां बलात्कार करने वाले आरोपी को कानून ने नहीं, बल्कि अपनी कराह रही बेटी के दर्द से परेशान पिता ने ही सजा दे डाली। वहीं, अब इसे आप क्या कहेंगे कि आरोपी को सजा देने के बजाय कानून ने बच्ची के पिता को ही सलाखों के पीछे डाल दिया है।

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पंजाब के बठिंडा जिले में एक 17 साल के लड़के ने मात्र 8 महीने की बच्ची के साथ घिनौनी हरकत कर पूरे देश को शर्मसार कर दिया। दिल को दहला देने वाला यह दर्दनाक हादसा अप्रैल 2014 में बठिंडा के कोटली अब्लु गांव में हुआ था, जहां पर घटना का आरोपी भी रहता था। इस आरोपी ने 8 माह की बच्ची के साथ बालात्कार कर उसे लहुलुहान हालत में छोड़ दिया था जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल तो भेज दिया, पर घटना के वक्त वह नाबालिग था। बठिंडा जिला अदालत में बीते मंगलवार को जब इस मामले की सुनवाई हुई तो कोर्ट के फैसले से बच्ची के पिता को काफी आघात लगा। जिसके बाद इस पिता ने स्वतः बदला लेने की सोची। कोर्ट की सुनवायी होने के बाद पीड़ित बच्ची के पिता ने आरोपी से समझौता करने की बात कहकर अपनी बाइक पर साथ चलने को कहा। जब ये लोग झुम्बा गांव की ओर पहुंचे तब पीड़िता के पिता ने किशोर को पकड़कर उसे एक पेड़ से बांध दिया। इसके बाद उस आरोपी के दोनों हाथ की कलाइयों को काट दिया। इसके बाद भी पिता के अंदर का दर्द शांत नहीं हुआ तो उसने आरोपी को और कई चोटें पहुंचाई।

पुलिस के अनुसार किशोर को बठिंडा अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है। बच्ची के पिता को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर लिया गया है।

यह कोई पहला मामला नहीं है। इस तरह के जघन्य अपराध आए दिन सुनने को मिल रहे हैं, जिसका सबसे कारण है कानून का सख्ती से पालन ना होना। कड़ी सजा ना मिलने के कारण यह दरिंदे बिना किसी डर के रोज ऐसी नादान बच्चियों को अपना शिकार बना रहे हैं। वहीं कानून इनकी सजा को कम कर इन्हें खुली आजादी दे रहा है। आज बेटी को बचाने की आवाज लगाने वाले लोग ही बतायें कि ऐसे हालात में किस तरह से सुरक्षित होंगी हमारी बेटियां।

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