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टाइगर टेंपल: बाघ और मानव की अभिन्न दोस्ती का एक मात्र प्रतीक

दुनिया भर में कुछ ऐसी जगहें हैं जहां पर जाने के लिए लोग क्रेजी रहते हैं। इन जगहों में से एक है थाईलैंड का टाइगर टेंपल। कंचनबुरी प्रांत के साईंयोक जिले में स्थित यह बौद्ध मंदिर दुनिया का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां बौद्ध भिक्षुओं के साथ बड़ी संख्या में बाघ रहते हैं। इसलिए इस मंदिर को टाइगर टेंपल के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर में बाघों के रहने से यह दुनियाभर के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है।

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बच्चा लाया गया था। यहां बाघ लाए जाने के पीछे एक रोचक किस्सा है। वर्ष 1999 बाघ की मां पहले ही शिकारियों का निशाना बन चुकी थी। इसके बाद शिकारियों से रक्षा करने के लिए उस बाघिन के शावक को यहां पर लाया गया था। हालांकि यह शावक कुछ ही दिनों तक जीवित रहा। इसके बाद से ही यहां पर शावकों को पालने की शुरूआत हुई जो अभी तक चल रही है।

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इस मंदिर की स्थापना जंगली जानवरों के लिए वन्य अभयारण्य के रूप में वर्ष 1994 में की गई थी। वर्ष 1999 में इस जगह पर पहला बाघ का

जानकारी के मुताबिक मंदिर में करीब 143 बंगाल टाइगर रह रहे हैं। सभी का स्वास्थ्य भी बिल्कुल ठीक है। इस मंदिर में सौ से ज्यादा बौद्ध भिक्षु निवास करते हैं। बाघों के बच्चे इन्हीं भिक्षुओं के साथ खेलते हुए बड़े होते हैं। यहां के बाघों में इंडोचाइनीज, बंगाल टाइगर और मलेशियाई टाइगर शामिल हैं। इन बाघों के साथ ही गाय, भैंस, बकरियों, घोड़े, भालू, मोर, हिरण भी मंदिर में रहते हैं। बाघ हिंसक न हो जाए इसके लिए उन्हें विशेष प्रकार की ट्रेनिंग दी जाती है।

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दुनियाभर के सैलानियों के लिए बना आर्कषण का केंद्र-
यह जगह देश विदेश के लोगों के लिए कौतुहल का विषय बनी रहती है। जो भी थाईलैंड आता है वो इस जगह जरूर आता है। हर साल भारी तादात में यहां पर लोग इन्हीं बाघों को करीब से देखने और इनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए पहुंचते है। यहां के बाघ भी बचपन से ही मनुष्यों के बीच रहते हैं। इस जगह पर्यटकों के लिए कुछ दिशा निर्देश भी दिए गए हैं। जिसमें बताया गया है कि यहां पर आने वालों को लाल रंग के कपड़े नहीं पहने हुए होना चाहिए। इस मंदिर में छोटे कपड़े पहनकर आना भी माना है। मंदिर परिसर में आने वालों को यहां पर शोर मचाने और दौड़भाग करने पर भी पाबंदी लगाई गई है।
यह मंदिर लोगों के लिए आर्कषण का केंद्र तो है ही साथ ही यहां पर जो भी आता है वो इसके अनुभव को पूरी जिंदगी भूल नहीं पाता है। इस मंदिर की लोकप्रियता यहां आने वाले सैलानियों की संख्या से आसानी से पता लगाई जा सकती है। हर वर्ष यहां आने वाले सैलानियों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। इसके चलते ही थाईलैंड का नाम विश्व के प्रमुख पयर्टक देशों की सूची में शामिल हो गया है।

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