लता मंगेशकर का गाया गीत बना पाकिस्तान का एंथम

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हमारे देश के सिनेमा जगत में कुछ चीजें ऐसी हुई है जिसने समाज को सच का आईना दिखाने में मजबूर किया है। जिससे कई ऐसी सीख मिली है जिससे समाज को सुधारा गया है। फिर चाहें किसी कलाकार के अभिनय की बात हो, या फिर किसी फिल्म की कहानी की..इससे समाज व देश को कई ऐसी सीखें मिली है जिसनें उन्हें सत्य से परिचित कराकर, ऐसा ना करने के लिए विवश किया है। इसी तरह से आज से कई साल पहले वी शांतारामबनी के द्वारा बनाई गई फिल्म ‘दो आंखें बारह हाथ’ 1957 में हर सिनेमा घरों में रिलीज हुई थी। इसकी कहानी से लेकर इसके गीत भी अमर हो गये । उन्हीं अमर गीतों में से एक गीत आज भारत में ही क्या सीमा पार उस देश में भी गाया जा रहा है जो आज के समय में हमारा सबसे बड़ा दुश्मन बना हुआ है, जी हां, हम बात कर रहें हैं पाकिस्तान की।

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लता मंगेशकर की आवाज ने जहां पूरे देश में अपनी खास पहचान बनाई थी, उसी तरह से इस गीत ने भी हर जगह एक दूसरे को जोड़े रखनें में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस गाने के बोल ने इस तरह से जादू बिखेरा है कि जिसे सनुने को हर देश उतावला रहता है, फिर चाहे पाकिस्तान ही क्यों ना हो। वी शांतारामबनी के द्वारा बनाई गई फिल्म ‘दो आंखें बारह हाथ’ का वह गीत जिसे शब्द हमारे दिल को छू जाते है। जिस के बोल थे “ए मालिक तेरे बंदे हम” इसे व्यास जी ने लिखा था और इसमे संगीत दिया था वसंत देसाई ने। लता मंंगेशकर की जादू भरी आवाज ने इस गाने में जान डाल दी थी। इस गीत का यही जादू इसे पाकिस्तान के स्कूल तक ले गया है, अब यह गीत पाकिस्तान के स्कूलों के एंथम में गाया जाता है। वहां के कई स्कूलों में सुबह इस प्रार्थना के साथ ही बच्चों के दिन की शुरुआत होती है।

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