जानिये धड़ से अलग होने के बाद भी आखिर क्यों हस पड़ा था मेघनाथ का सिर

मेघनाथ

 

क्या किसी व्यक्ति का सिर कट कर भी हस सकता है। शायद नहीं पर ऐसा वास्तव में हो चुका है। आज हम आपको इतिहास के एक ऐसे व्यक्ति के बारे में यहां बता रहें हैं। जिसका सिर कटने के बाद स्वयं हसने लगा था। यह वाक्या रामायण काल का है। रामायण में कई ऐसे योद्धाओं का वर्णन हुआ है जो अपने में बहुत वीर थे। इनमें से एक था इंद्रजीत। इसको रावण का सबसे शूरवीर बेटा कहा जाता है। सामान्य रूप से हम उसको मेघनाथ के नाम से जानते है क्योंकि वह बादलों में छुप कर युद्ध करता था। इंद्रजीत का वध लक्ष्मण ने किया था। मौत के बाद भी उसका कटा सिर हंसने लगा था। आज आपको इसी बारे में बताया जा रहा है कि आखिर मेघनाथ का सिर मौत के बाद क्यों बोल उठा था।

लक्षम जी ने किया था वध

मेघनाथImage Source: 

इंद्रजीत का वध लक्ष्मण जी ने किया था। इंद्रजीत ने अपने बहादुरी का परिचय युद्ध के मैदान के बखूबी दिया था। उसने ऐसे ऐसे वार किये थे जिनके बच पाना किसी के लिए मुमकिन नहीं था। अंत में लक्ष्मण जी द्वारा उसका वध हुआ था। मेघनाथ का सिर कट कर जब श्रीराम के क़दमों में जा गिरा था तो श्रीराम चाहते थे कि मेघनाथ की मौत की खबर लंका तक पहुंचाई जाए इसलिए उन्होंने अपने बाण की सहायता से मेघनाथ की एक भुजा को लंका में पंहुचा दिया था। वह भुजा मेघनाथ की पत्नी के पास में आकर गिरी। जिससे उसको यकीन हुआ कि मेघनाथ की मौत हो चुकी है। ऐसे में उसने उस भुजा से आग्रह किया की वह उसको कुछ बताये। भुजा ऐसा सुनते ही फड़कने लगी और उसने कलम की सहायता से लक्ष्मण जी की प्रशंसा में कुछ शब्द लिखें। इसके बाद मेघनाथ की पत्नी की भरोसा हो गया था कि मेघनाथ मारा जा चुका है।

जब हंस पड़ा मेघनाथ का सिर

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मेघनाथ की मौत के बाद उसकी पत्नी सुलोचना अपनी सास मंदोदरी के कहने पर श्रीराम के पास अपने पति का सिर लेने पहुंची। श्रीराम उसके दुःख को देख कर द्रवित हो गए और उन्होंने सुग्रीव की सहायता से मेघनाथ का सिर मंगवाया। मेघनाथ की भुजा ने लक्ष्मण जी के लिए प्रशंसा के शब्द लिखे थे इसलिए वहां के लोग सुलोचना की इस बात पर विश्वास नहीं कर पाए। तब सभी लोगों ने सुलोचना से कहा कि आप मेघनाथ के सिर से कहें कि वह हंस कर दिखाए तब ही हम लोगों को तुम्हारी बात पर भरोसा होगा। इसके बाद सुलोचना ने मेघनाथ के कटे सिर से हंसने की प्रार्थना की। इसके बाद मेघनाथ का सिर हंसने लगा। इस प्रकार से मेघनाथ का सिर काटने के बाद में भी हंसने लगा था।

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