पावागढ़ काली मंदिर- हिंदू-मुस्लिम एकता को सदैव बढ़ावा देता आया है यह स्थल

पावागढ़ काली मंदिर

 

अपने देश में देवी मां के बहुत से मंदिर हैं, पर जिस मंदिर के बारे में हम आपको आज बता रहें हैं वह अपने आप में अनोखा तो हैं ही साथ ही ऐतिहासिक भी है। यह एक ऐसा मंदिर है, जहां पर हिंदू तथा मुस्लिम लोग साथ में आते जाते हैं। यह स्थान दोनों धर्मों में सदियों से प्रेम तथा भाई चारा बनाता आया है। आपको बता दें कि यह मंदिर देवी महाकाली को समर्पित है तथा गुजरात के पंचमहल जिले में स्थित है। इस मंदिर का नाम पावागढ़ काली मंदिर है।

यह मंदिर न सिर्फ एक तीर्थ स्थल के रूप में प्रसिध्द है बल्कि पर्यटन के उद्देश्य से भी अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण है। इस मंदिर में देवी काली की दक्षिणमुखी प्रतिमा है जिसका तंत्र साधना में बहुत ज्यादा महत्त्व माना जाता है। पावागढ़ काली मंदिर पहाड़ी पर स्थित है। इस पर जाने की यात्रा चंपानेर से शुरू होती है। 1471 फिट की ऊंचाई पर जाने पर माची हवेली स्थित है। मंदिर तक जानें के लिए भक्तों को करीब 250 सीढ़ियां चढ़नी होती हैं।

लव-कुश समेत कई ऋषियों की रही है मोक्ष भूमि

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पावागढ़ काली मंदिर जिस स्थान पर अवस्थित है। वह अत्यंत सिद्ध स्थान माना जाता है। माना जाता है कि इसी स्थान पर बने मंदिर में देवी महाकाली की प्रतिमा को ऋषि विश्वामित्र ने स्थापित किया था। इस मंदिर की पहाड़ी के तल में प्रवाहित नदी को विश्वामित्री कहा जाता है। प्राचीन काल में इस मंदिर का नाम शत्रुजय था। मान्यता है कि भगवान श्रीराम के पुत्र लव-कुश समेत अनेक ऋषियों ने इसी स्थान से मोक्ष को पाया था। अनेक बौद्ध संतों ने भी इसी स्थान पर मोक्ष को पाया है।

हिंदू-मुस्लिम एकता को दर्शाता है यह स्थान

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पावागढ़ काली मंदिर का यह स्थान प्राचीनकाल से हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक रहा है। इस मंदिर की छत से लगी हुई एक दरगाह भी है। इसको सदन शाह पीर की दरगाह कहा जाता है। इस स्थान पर मुस्लिम लोग काफी संख्या में आते हैं। इस प्रकार से एक ही स्थान की यात्रा पर हिन्दू तथा मुस्लिम लोग साथ चलते हैं। इस प्रकार पूर्वकाल से यह स्थान हिन्दू तथा मुस्लिम लोगों के बीच आस्था का केंद्र बना हुआ है।

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