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इंडिया से डिजिटल इंडिया और अब न्यू इंडिया – सर जी, नो उल्लू बनाविंग

india becomes new india from digital india cover

वर्तमान में न्यू इंडिया शब्द सभी के दिलों दिमाग पर छाया हुआ हैं। यह शब्द वस्तुतः मोदी जी के “मन के विचार” है और आजकल जनता में खूब उपज रहा हैं। बात साफ़ सी है कि इंडिया को 2022 तक न्यू इंडिया में परिवर्तित करना हैं कोई पूछे मोदी से की उनका शासन काल तो 2019 में ही ख़त्म हो रहा हैं। ऐसे में न्यू इंडिया 2022 तक कैसे बनेगा।

अब सीधी सीधी बात यह हैं कि अगर न्यू इंडिया बनाना हैं तो मोदी जी को 2022 तक पी.एम बनाए रखना होगा। खैर अब मोदी जी अगर नया भारत बनाने पर तुले हैं तो यही सही। वैसे देखा जाए तो हमारे देश ने बदलते नामों के कारण ही प्रगति की है। पहले अपने देश का नाम “हिन्दुस्तान” था। उस दौर के लोग दूसरे के लिए अपनी जान भी दे देते थे।

इसके बाद में देश का नाम “भारत” हुआ तो लोगों में देश के लिए जान देने का भाव प्रकट हुआ, लेकिन सिर्फ “भाव” ही पैदा हुआ। फिर देश का नाम “इंडिया” होते ही यह “भाव” आभाव में परिवर्तित होने लगा और आज एक दूसरे के लिए जान देने का भाव, एक-दूसरे की जान लेने के भाव में परिवर्तित हो चुका हैं।

भगवान श्रीकृष्ण ने तो इस बारे में 5 हजार वर्ष पहले ही भविष्यवाणी कर दी थी कि “परिवर्तन ही संसार का नियम है।” तो भैया देखा जाए तो हिंदुस्तान से अब तक बदले देश के इन नामों में ही “गीता का रहस्य” छुपा हुआ हैं। अब मोदी जी देश को शायद वर्तमान स्थिति से भी आगे ले जाना चाहते हैं इसलिए उन्होंने झटपट देश को कई दे दिए हैं ।मसलन इंडिया से डिजिटल इंडिया और अब न्यू इंडिया

अब इस न्यू इंडिया का भविष्य क्या होगा। इस बारे में आप मत सोचिये। इसको भविष्य के लिए ही छोड़ दें क्योंकि आज इंडिया में आक्सीजन के बैगर बच्चे मर रहें हैं और डॉक्टर भगवान के स्थान की जगह यमराज की सीट कब्जाए हुए हैं तो न्यू इंडिया का भविष्य तय करना बड़ा खतरनाक सा लगता हैं।

बाजार गया तो एक सब्जी वाले ने पूछ लिया – भैया ये न्यू इंडिया क्या है, इससे अपने को फायदा होगा ?
मैंने कहा – ये बताओं कि जब इंडिया से अपना देश डिजिटल इंडिया बना तो तुम को क्या फायदा हुआ ? क्या तुम्हारी आमदनी बढ़ी या क्या किसी खरीदार ने तुमको कहा की सब्जी महंगी हैं ?

वो बोला – मजाक क्यों करते हो साहब, हम तो तब भी ऐसे ही थे जैसे आज हैं।
मैंने कहा – मजाक कौन कर रहा हैं यह तुम अभी नहीं समझोगे। उस समय समझोगे जब न्यू इंडिया का न्यू मॉल इस जगह होगा और तब न तुम यहां होंगे और न तुम्हारी रेहड़ी। इसी के साथ सब्जी वाला गहरी सोच में डूब गया। शायद वह न्यू इंडिया में अपने भविष्य को तलाश रहा था। खैर उसको उसके सपनों में छोड़ मैं आगे बढ़ गया।

विशेष नोट- इस तरह के आलेख से हमारा उद्देश्य केवल आपका मनोरंजन करना हैं। इसमें मौजूद नाम, संस्था और राजनीतिक पार्टियों की छवि को धूमिल करना हमारा उद्देश्य नहीं हैं। साथ ही इसमें बताया गया घटनाक्रम मात्र काल्पनिक हैं। अगर इससे कोई आहत होता हैं तो हमें बेहद खेद हैं।

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