इस गौशाला में रामायण व मीरा के भजन सुन दूध देने की क्षमता बढ़ा देती हैं गायें

कान्हा की मुरली की धुन सुनकर ब्रजधाम की गाये कान्हा से मिलने के लिये रंभाने लगती थी। जिसके बारे में हम पुराने किस्से कहानियों में सुनते आ रहें हैं। ये बात सच है कि पक्षु-पक्षियों को भी संंगीत सुनना काफी पंसद होता है। वहीं गायों को भी संगीत की धुन काफी अच्छी लगती है और यही अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है राजस्थान की एक गौशाला में..

अक्सर देखा जाता है कि गायों के दूध देने की क्षमता को बढ़ाने के लिए लोग इंग्जेक्शन या दवाओं का सहारा लेते है, लेकिन ये इंग्जेक्शन या दवाएं गायों के लिए काफी नुकसानदायक होता है साथ ही में दूध में इसके गुण चले जाने के कारण ये हमारे स्वास्थ पर बेहद ही खतरनाक असर डालते हैं। लेकिन इस चीज से छुटकारा पाने के लिए एक अद्भुत सा हल खोज निकाला है। जिसे सुनने में भले ही आपको हैरानी लगे, पर यह बात सच है कि राजस्थान की एक गौशाला में गायों को संगीत सुनाया जाता है, ताकि उन्हें वो संगीत अच्छा लगे और वह अपने दूध देने की क्षमता को बड़ा दें। संगीत की ताकत के सामने कई दवाइयां भी फ़ैल हैं। राजस्‍थान की गौशाला में बड़ी संख्‍या में गायों के लिए म्यूजिक सिस्टम या लाउडस्पीकर पर मीरा के भजन और रामचरितमानस को सुनाया जाता है, जिसे सुनने के बाद यहां की सभी गाये खुशी से थिरकने लगती है। खास बात तो ये है कि इन सिस्टम में जितनी देर तक गाने बजते हैं गायें उतनी ही देर तक दूध देती है। इससे दूध की मात्रा भी बढ़ जाती है।

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अब यहां पर रोज सुबह और शाम स्‍पेशली गायों को सुनाने के लिए संगीत और भजन की धुन बजाई जाती है। इस बारे में गौशाला के मालिक का मानना है कि उन्होंने काफी समय पहले सुना था कि गायों को संगीत एवं भजन काफी पसंद होते हैं। इससे उनके हारमोन्स में काफी तेजी से बदलाव होने लगते है। जब उन्होंने इस विधि को अपनाया तो उसका परिणाम काफी अच्छा निकला।

अब जानवरों को इसका फायदा कितना हो रहा है ये तो नहीं बता सकते, पर इस काम से यहां के लोग ने फिल्मी गानों के स्थान पर भजन कीर्तनों को सुनना शुरू कर दिया है।

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