स्तन कैंसर के कारण और बचाव

महिलाओं में स्तन कैंसर की समस्या बढ़ती जा रही है। युवावस्था पार करने और शादी के बाद ज्यादातर महिलाओं के मन में स्तन कैंसर के प्रति डर सताने लगता है। चिकित्सकों की मानें तो अगर स्तन कैंसर के प्रति शुरू से सतर्क रहा जाए या समय से इसका इलाज शुरू कर दिया जाए तो स्तन कैंसर के दुष्प्रभावों से काफी हद तक बचा जा सकता है।

महिलाओं में स्तन कैंसर जैसी बीमारियां काफी सुनने में आ रही हैं। अगर इस बीमारी के प्रति शुरू से सतर्क रहा जाए तो इसके खतरे को कम किया जा सकता है।

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चिकित्सकों की मानें तो नवजात शिशु को स्तनपान कराने वाली महिलाओं को स्तन कैंसर का खतरा कम हो जाता है। मां का दूध नवजात बच्चे के लिए भी सर्वोत्तम माना जाता है।
बीते दिनों अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुए एक शोध में पाया गया कि जो महिलाएं अपने बच्चों को स्तनपान कराती हैं उनको हार्मोन रिसेप्टर निगेटिव (एचआरएन) स्तन कैंसर का जोखिम 20 फीसदी तक कम हो जाता है।

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शोधकर्ताओं के मुताकि एचआरएन स्तन कैंसर बेहद घातक होता है। इससे प्रभावित महिला की मौत तक हो सकती है। ऐसा माना जाता है कि 50 साल से कम उम्र की महिलाओं को इसकी चपेट में आने की संभावना ज्यादा रहती है।

वहीं, अगर स्तन कैंसर के कारणों की बात करें तो जो महिलाएं अपने बच्चों को स्तनपान नहीं करातीं उनमें यह बीमारी होने का खतरा रहता है। इसके अलावा मोटापा और कई बार जल्द गर्भधारण करने की वजह से भी महिलाओं को एचआरएन स्तन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में जरूरत है कि इन स्थितियों से बचाव कर अपना स्वास्थ्य बेहतर रखें।

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