64 योगिनी मंदिर –  इस शिव मंदिर में नहीं चढ़ाया जाता है जल, पुरानी है यह परंपरा

64 योगिनी मंदिर

64 योगिनी मंदिर के बारे में शायद आप न जानते हों। यह मंदिर मध्य प्रदेश के जबलपुर से 17 किमी दूर स्थित भेड़ाघाट नामक स्थान पर स्थित है। भेड़ाघाट मध्य प्रदेश के पर्यटन स्थान भी कहा जाता है। इस स्थान पर पहुंचने के लोगों को पहाड़ी पर चढ़ना होता है। मंदिर तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां भी बनाई गई हैं। आपको बता दें की 64 योगिनी मंदिर को दो चरणों में बनाया गया था यह काफी प्राचीन मंदिर है। पहले चरण में कलचुरिकाल के युवराजदेव-महारानी नोहलादेवी ने 955 ईस्वी में इस मंदिर का निर्माण कार्य प्रारंभ कराया था। इसके बाद दूसरे चरण में महाराज दयाकरण की पत्नी राजमाता अल्हण देवी ने 1155 ईस्वी के आसपास इस मंदिर का निर्माण कराया था।

यह पौराणिक कथा जुड़ी है इस मंदिर के साथ –

यह पौराणिक कथा जुड़ी है इस मंदिर के साथImage source:

इस मंदिर के साथ एक पौराणिक कथा भी जुड़ी है। यह कथा वशिष्ठ संहिता नामक ग्रंथ में आती है। इस कथा में बताया गया है की एक बार भगवान शिव तथा देवी पार्वती विश्व भ्रमण के लिए निकले थे। जब वे इस मंदिर वाले स्थान पर पहुचें तो उन्होंने वहां ऋषि सुपर्ण को तप करते देखा। भगवान शिव ने ऋषि को कोई वरदान मांगने के लिए बोला। ऋषि ने कहा की मैं आपका पूजन करना चाहता हूं और वे भगवान शिव के पूजन के लिए जल तथा फल फूल लेने के लिए नर्मदा किनारे चले गए। वहां नर्मदा ने ऋषि से कहा की वे उनके माता पिता को रोक लें। इस वजह से ऋषि भगवान शिव के पास नहीं आ पाए तथा भगवान शिव ऋषि का इंतजार करते रहे बाद वे देवी पार्वती सही उस स्थान पर ही स्थापित हो गए।

नहीं किया जाता है जलाभिषेक –

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64 योगिनी मंदिर के मध्य भाग में भगवान शिव का मंदिर बना हुआ है। जिसमें भगवान शिव तथा देवी पार्वती की एक प्रतिमा है। इस प्रतिमा में भगवान शिव देवी पार्वती से पीछे की और मुंह करके कुछ पूछ रहें हैं। 64 योगिनी मंदिर में बनी इस प्रतिमा पर जलाभिषेक नहीं किया जाता है बल्कि मंदिर के बाहर महंतों द्वारा स्थापित शिवलिंग पर ही जल चढ़ाया जाता है। भेड़ाघाट चूंकि एक पर्यटक स्थल है इसलिए वर्षभर यहां लोग घूमने आते रहते है। इस मंदिर में महाशिवरात्रि तथा सावन माह में पूजन करने का विशेष महत्त्व बताया जाता है।

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