परमाणु हथियार रखते थे महाभारत युद्ध के ये महान योद्धा

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 महाभारत के युद्ध में एक से बड़े एक योद्धा थे और एक दूसरे से ज्यादा शक्तिशाली भी। इनमें से कुछ लोग ऐसे भी थे जिनके पास परमाणु हथियार भी थे। असल में जिस प्रकार आज यह कहा जाता है की परमाणु हथियारों के प्रयोग से दुनियां तबाह हो सकती है। उसी प्रकार के हथियार महाभारत युद्ध के कुछ महान तथा शक्तिशाली योद्धाओं के पास में भी थे। यदि वे ऐसे हथियारों का यूज उस युद्ध में करते तो तबाही होना निश्चित ही था। इन हथियारों में एक का नाम “ब्रह्मास्त्र” भी था। यह सारी दुनियां में तबाही लाने के लिए अकेला ही काफी था अतः युद्ध से पहले इस बात को यह कर लिया गया था की युद्ध में कोई भी योद्धा ब्रह्मास्त्र का यूज नहीं करेगा। आज हम आपको महाभारत के कुछ ऐसे लोगों से मिला रहें हैं। जिनके पास परमाणु हथियारों से भी घातक हथियार थे। आइये जानते हैं इन योद्धाओं के बारे में।

1 – अश्वत्थामा

अश्वत्थामाImage source:

अश्वत्थामा पांडव तथा कौरवों के गुरु द्रोणाचार्य का पुत्र था। यह एक ऐसा योद्धा था जिसने महाभारत युद्ध के कानून को भंग कर ब्रह्मास्त्र चला डाला था। उस समय इसके कारण सारी पृथ्वी का अस्तित्व खतरे में पड़ गया था। तब अर्जुन ने अपने ब्रह्मास्त्र से इसके हथियार की मारक क्षमता को ख़त्म कर पृथ्वी तथा इसके सम्पूर्ण जीवन को बचाया था।

2 – अर्जुन

 अर्जुन Image source:

अर्जुन महाभारत का वह दुसरा योद्धा था। जिसके पास में ब्रह्मास्त्र जैसा घातक परमाणु हथियार था। जब अश्वत्थामा ने अपने ब्रह्मास्त्र को चला दिया था तब अर्जुन ने उसके हथियार को रोकने के लिए अपना ब्रह्मास्त्र चलाया था। महाभारत में लिखा है की जब दोनों हथियार टकराएं तो चारों और इतना प्रकाश हुआ जैसे सूरज धरती पर उतर आया हो साथ ही इतनी गर्मी हुई की सैनिकों की चमड़ी उतरने लगी थी।

3 – भीष्म पितामह

 भीष्म पितामह Image source:

भीष्म पितामह कौरवो तथा पांडवों दोनों के आदरणीय थे। इनके पास भी ब्रह्मास्त्र जैसा घातक शस्त्र था। लेकिन महाभारत के युद्ध के दौरान इन्होने उसका कभी प्रयोग नहीं किया। हां इनके जीवन में कई ऐसे मोड़ आये जब इन्हें लगा की ब्रह्मास्त्र का यूज किया जाना चाहिए लेकिन फिर अपने अंतर्मन की आवाज सुनकर इन्होने कभी वैसा नहीं किया।

4 – दानवीर कर्ण

 दानवीर कर्णImage source:

कर्ण को दानवीर भी कहा जाता है। असल में कर्ण अपने द्वार पर आये हुए किसी भी व्यक्ति को खाली हाथ नहीं जानें देता था। अतः उसको दानवीर भी कहा जाता है। कर्ण के पास भी ब्रह्मास्त्र था लेकिन युद्ध के नियमों का पालन करने के चलते कर्ण ने कभी भी उसका यूज नहीं किया था।

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किसी भी लेखक का संसार उसके विचार होते है, जिन्हे वो कागज़ पर कलम के माध्यम से प्रगट करता है। मुझे पढ़ना ही मुझे जानना है। श्री= [प्रेम,शांति, ऐश्वर्यता]

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