जानें भारत के मंदिरों में छिपे 5 रहस्यमय खजानों का राज!

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भारत में छिपी अनमोल गाथाओं के राज इतिहास के पन्नों में दबे पड़े हैं जिससे लोग अंजान हैं, पर किसी समय सोने के चिड़िया के नाम से पहचाने जाने वाले भारत के अनमोल खजाने की बातें किसी से छिपी नहीं हैं। भारत अपने सोने, चांदी, हीरे जवाहरात की वजह से सबसे धनी देशों में गिना जाता था। जिसे लूटने के लिये दूर देश के लोग ना जाने कितनी बार भारत आये और कितनी बार हमारी पुरानी विरासत को लूट ले गये, पर भारत की छिपी हुई पुरानी विरासत को कोई भी पूरी तरह लूट नहीं पाया। आज भी कई अनमोल खजाने भारत की धरती से लेकर कई मंदिरों की दीवारों तक में दबे पड़े हैं। आज हम आपको ऐसे ही कुछ कीमती रहस्यमयी खजानों के बारे में बता रहे हैं, जिनके बारे में विशेषज्ञ भी हैरान हैं।

वैसे भी आप भारत की अमीरी का अंदाजा पद्मनाभस्वामी मंदिर में पाये गये अनमोल खजाने से लगा सकते हैं। जिसकी कीमत लगभग 22 अरब डॉलर आंकी गई है।

पद्मनाभस्वामी मंदिर-

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अनेक तीर्थ स्थलों में से एक पद्मनाभस्वामी मंदिर भारत के केरल राज्य के तिरूअनन्तरमपुरम में स्थित है। यह लाखों श्रृद्धालुओं की अराधना स्थली बन चुका है। इस मंदिर के बारे में जाना जाए तो यह शुरू से ही रहस्यों से घिरता आया है। बताया जाता है कि एक पावन स्थली में भगवान विष्णु की प्रतिमा अपने आप ही देखी गई थी। जिसके बाद वहां के राजा मार्तंड सिंह ने एक बड़े मंदिर का निर्माण करा कर पावन स्थल बना दिया। आज भी इस मंदिर में कई रहस्य देखने को मिल रहे हैं। इस मंदिर के प्रत्येक तहखाने में अद्भुत चमत्कार के साथ करोड़ों अरबों के खजाने मिलते जा रहे हैं। यह सिलसिला अभी तक रुकने का नाम नहीं ले रहा है। जिसमें से मंदिर का एक अहम चैंबर का काम सरकार की तरफ से बंद करा दिया गया है। कहा जाता है कि जिस चैंबर से सबसे कीमती खजाना निकलना बाकी है वहां पर किसी नाग (कोबरा) का बसेरा है, जो इस खजाने की रक्षा कर रहा है। डर की वजह से कोई उसके करीब जाता नहीं।

कृष्णा नदी का खजाना, यहीं से आया था ‘कोहिनूर’-

कृष्णा-नदी-का-खजाना-यहीं-से-आया-था-कोहिनूरImage Source :http://i9.dainikbhaskar.com/thumbnail/

दुनिया के सबसे बेशकीमती हीरे हैदराबाद के गोलाकुंडा से मिले हैं। इसी राज्य में हीरे की बहुत बड़ी खदान भी पाई गई है। दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे दुर्लभ कोहिनूर हीरा इसी खान की देन है। जो अब इंग्लैड की महारानी के ताज की शोभा बढ़ा रहा है। इसे लूटने के लिये ना जाने कितने विदेशी लोगों ने भारत पर आक्रमण किया।

श्री मोक्कमबिका मंदिर, कर्नाटक-

श्री मोक्कमबिका मंदिर कर्नाटक के पश्चिमी घाट पर बने सबसे पुराने मंदिर के रूप में जाना जाता है। यहां पर काफी श्रद्धालु अपनी पूर्ण भक्ति और श्रृद्धा के साथ आते हैं और अपनी श्रद्धानुसार भेंट चढ़ाते हैं। यहां पर छुपा है करोड़ों का खजाना, जिसके और अधिक होने की अशंका भी जताई जा रही है। बताया जाता है कि इस मंदिर की मूर्तियों पर 100 करोड़ से अधिक के सिर्फ गहने ही चढ़े हैं। इस मंदिर की सालाना आय 17 करोड़ से भी अधिक है, पर इसकी कर व्यावस्था में इससे अधिक की लागत लग जाती है। इसके रख रखाव का खर्च ही 35 करोड़ के लगभग आता है। मंदिर के पुजारियों से लेकर वहां के श्रद्धालुओं का भी कहना है कि इस मंदिर में कुबेर का खजाना छिपा हुआ है। जिसकी रक्षा एक नाग के द्वारा की जा रही है, जो अंदर के और अधिक खजानों का संकेत भी दे रहा है।

श्री-मोक्कमबिका-मंदिर,-कर्नाटक-Image Source :http://i9.dainikbhaskar.com/thumbnail/

नादिर शाह का खजाना-

भारत की अनमोल विरासत पर हमेशा से ही दूसरे लोगों की आखें गड़ी हुई थीं, क्योंकि भारत में मौजूद बेशुमार हीरे जवाहरात लोगों को अपनी ओर अकर्षित कर रहे थे। इसी में एक थे ईरानी शासक नादिर शाह। सन् 1739 में इस शासक ने कई हजार सैनिकों के साथ राजधानी दिल्ली पर आक्रमण बोल दिया। जिसमें कई हजारों निर्दोष लोग इसके आक्रमण का शिकार बने। नादिर शाह ने भारत से कई करोड़ों के सोने के सिक्के, बेशकीमती हीरे जवाहरात के साथ कोहिनूर हीरे के साथ तख्त-ए-ताऊस भी लूट लिया था, जो आज इस समय ब्रिटिश के राजमुकुट की शोभा बढ़ा रहा है। बताया तो यहां तक जाता है कि भारत की अचूक संपदा को देख वह इतना लालची हो गया कि युद्ध के दौरान भारत के पूरे खजाने पर अपनी नजर नहीं रख पाया और वापस लौटते वक्त नादिर शाह से जुड़े बड़े अफसर और सिपहसालारों ने बचे हुए बाकि खजानों को छिपा दिया। इस बेशकीमती खजाने को आज भी खोजा जा रहा है।

नादिर-शाह-का-खजाना-Image Source :http://i9.dainikbhaskar.com/thumbnail/

बिहार के सोनभंदर गुफाओं से जुड़े खजाने –

सोनभंदर-गुफाओं-से-जुड़े-खजाने

बिहार के राजगीर की चट्टानों में बनी गुफाओं में भी रहस्यमयी खजाने छुपे हैं। जिसके पास पहुंचना हर किसी के बस की बात नहीं है। इस खजाने को लूटने के लिये अंग्रेजों ने कई तोपों और बारूदों का इस्तेमाल कर इसे लूटने की कोशिश की, पर इस गुफा का कोई भी बाल बांका नहीं कर पाया। ऐसा माना जाता है कि ये गुफाएं तीसरी या चौथी सदी से वहां मौजूद हैं। जहां पर इन गुफाओं से होकर एक रास्ता जाता है जो राजा बिंबिसार के खजाने तक पहुंचता है। ऐसा कहा जाता है कि यह खजाना आज भी ज्यों का त्यों पड़ा हुआ है। अंग्रेजों ने भी तोप के गोले मारकर इस खजाने को लूटने का प्रयास किया था, लेकिन सफल नहीं हो सके।

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