दिल्ली को फिर बे‘कार’ करने आ गया ऑड-इवन

दिल्ली सरकार ने यूं तो ऑड ईवन नियम को दिल्ली में प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए काफी समय पहले ही लागू कर दिया था, लेकिन 1 जनवरी से 15 जनवरी तक चले इसके पहले ट्रायल के सफल होने के बाद अब दिल्लीवालों के लिए इसका दूसरा चरण लागू होने जा रहा है। दिल्ली में आज सीएम अरविंद केजरीवाल ने घोषणा करते हुए कहा है कि इसका दूसरा चरण 15 से 30 अप्रैल तक लागू होगा। जिसमें पहले चरण की तरह महिलाओं, वीआईपी और दुपहिया वाहनों को छूट बरकरार रहेगी।

सीएम केजरीवाल ने इसे काफी सफल बताते हुए कहा कि लोगों की सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने के बाद ही इसके दूसरे चरण को लागू किया जा रहा है। ज्यादातर लोग इस नियम को लागू करवाना चाहते हैं। जिसको देखते हुए अब सरकार इस योजना को हर महीने में 15 दिनों के लिए लागू करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। केजरीवाल ने कहा, ‘हमें 1.13 लाख से अधिक मिस्ड काल, दो लाख आईवीआरएस और नौ हजार ईमेल के जरिये लोगों की प्रतिक्रियाएं मिली हैं।’ जिसमें से 53 प्रतिशत लोग 14 फरवरी से ही योजना की वापसी चाहते थे। वहीं, करीब 1800 लोगों का कहना है कि वे योजना से बचने के लिए दूसरी कार खरीदेंगे लेकिन इसके लिए हर व्यक्ति बस यही चाहता है कि इस नियम में वीआईपी को छूट नहीं मिले।

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जिसके बाद सीएम ने वीआईपी लोगों से प्रार्थना करते हुए कहा कि, ‘हम आपसे लड़ाई नहीं करेंगे जैसा कि हम पर अक्सर आरोप लगता है। हम चाहेंगे कि प्रधान न्यायाधीश की तरह आप भी योजना का पालन करें।’

हालांकि इस मौके पर उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि दिल्ली का सार्वजनिक परिवहन फिलहाल दिल्ली की भीड़ से निपटने के लिए सक्षम नहीं है, लेकिन दिल्ली सरकार जल्द 1000 लक्जरी बस सहित तीन हजार नई बसें खरीद रही है। जिन्हें सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाने के प्रयास के तहत दिसंबर तक सड़कों पर उतारा जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि यातायात के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए दो मंजिला एलीवेटिड बस रैपिड ट्रांजिट कारिडोर का निर्माण भी किया जाएगा। केजरीवाल का कहना है कि अब यह योजना 15 से 30 अप्रैल तक लागू की जाएगी क्योंकि बोर्ड परीक्षाएं 12 अप्रैल को संपन्न हो रही हैं और हम इसके बाद ही योजना को लागू करेंगे।

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वहीं, उन्होंने यह भी कहा कि इस योजना को स्थायी रूप से लागू नहीं किया जाएगा क्योंकि ऐसा करने पर लोग पुलिसकर्मियों को रिश्वत देने सहित इससे बचने के रास्ते खोजना शुरू कर देंगे। अब ऐसे में देखना यह दिलचस्प होगा कि इस बार जनता इस नियम को किस रूप में स्वीकारती है।

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