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संस्कृत सीखते हैं मुस्लिम बच्चे और हिंदू पढ़ते हैं उर्दू, जानिये इस सांप्रदायिक सद्भाव वाले स्थान के बारे में

सांप्रदायिक सद्भाव

 

हमारे के कई स्थानों पर सांप्रदायिक सद्भाव इस कदर देखने को मिलता हैं कि उसे देखने वाले लोग भी हैरान रह जाते हैं। आज हम आपको ऐसे ही एक स्थान के बारे में बता रहें हैं। यहां एक तरफ मुस्लिम अपने बच्चों को संस्कृत सीखने के लिए स्कूल भेज रहें हैं तो दूसरी और हिंदू अपने बच्चों को उर्दू की तहजीब और इल्म देने के लिए मदरसे में पढ़ने भेजते हैं।

वर्तमान समय में किसी इंसान को किसी धर्म या विशेष मान्यता से जोड़ कर नहीं देखा जा सकता। आज हर व्यक्ति शांति और भाईचारे के साथ अपना जीवन व्यतीत करना चाहता हैं। इस के लिए भाषा अपना बड़ा योगदान देती हैं। अब आइये आपको बताते हैं कि आखिर सांप्रदायिक सद्भाव की मिसाल पैदा करने वाला यह स्थान आखिर कहां पर हैं।

सरस्वती शिशु विद्या मंदिर और मुस्लिम छात्र –

सांप्रदायिक सद्भावImage Source: 

गंगा-जमुनी तहजीब का यह पथ बच्चे उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में पढ़ रहें हैं। यहां के अस्तबल रोड स्थित मदरसे तथा सरस्वती शिशु मंदिर में आजकल बच्चों को जो शिक्षा दी जा रही हैं वह भविष्य में न सिर्फ इन बच्चों के लिए बल्कि देश के लिए भी लाभकारी साबित होगी। अस्तबल रोड स्थित जमीयतुल अंसार मदरसे में राम शिक्षा ग्रहण करते नजर आते हैं तो सरस्वती शिशु मंदिर में रहीम संस्कृत के श्लोकों का पाठ करते नजर पड़ते हैं।

यहां के सरस्वती शिशु विद्या मंदिर इंटर कालेज में सनातन धर्म पर आधारित शिक्षा दी जाती हैं। इसमें सूर्य नमस्कार से लेकर योग और धार्मिक ग्रंथों का पाठ पाठ्यक्रम में शामिल होता हैं। आपको जानकर हैरानी होगी की इस स्कूल के 350 में से 50 विद्यार्थी मुस्लिम धर्म से हैं।

जमीयतुल मदरसा और हिंदू छात्र –

सांप्रदायिक सद्भावImage Source: 

इसी रोड पर जमीयतुल अंसार मदरसे में आपको बहुत से हिंदू बच्चे पढ़ते नजर आ जायेंगे। यहां पर मुस्लिम तथा हिंदू बच्चे साथ में उर्दू भाषा पढ़ते हैं। यह मदरसा हाई स्कूल तक मान्यता प्राप्त हैं। इसको 1952 में शुरू किया गया था और तब से ही यहां सर्वधर्म भाव बना हुआ हैं इसलिए इस मदरसे में हर तबके के बच्चे शिक्षा ग्रहण करने के लिए आते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना हैं कि वे अपने बच्चों को मदरसे की अच्छी शिक्षा तथा अच्छे वातावरण के चलते वहां भेजते हैं। देखा जाए तो आज के समय में इसी मानसिकता की जरुरत हैं जो हिंदू तथा मुस्लिम लोगों को सामान स्तर पर लाए और दोनों को सहज भाव से साथ में जीना सिखाए।

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