जानिए नागमणि की वास्तविकता के बारे में, पढ़ें यहां

नागमणि

नागमणि के बारे में आपने बहुत कुछ पढ़ा व सुना होगा, पर क्या आप जानना चाहते हैं कि वास्तव में नागमणि होती क्या है तो आप हमारे इस आलेख को ध्यान से पढ़िए। आज हम आपके सामने नागमणि की सारी वास्तविकता को बता रहें हैं। यह जानकारी पढ़कर आप खुद अनुभव करेंगे कि जैसा आज तक नागमणि के बारे में बताया जाता रहा है। वैसा कुछ है ही नहीं। आपको बता दें कि वैज्ञानिक इस बात को स्वीकारते हैं कि नाग मणि होती है। वे इसको एक पत्थर के जैसा बताते हैं। उनके अनुसार नागमणि एक पत्थर होता है

जिसको कई प्रकार के कार्यों में यूज किया जा सकता है। नागमणि का महत्त्व ज्योतिष शास्त्र में भी है। बहुत से ज्योतिषी इसका प्रयोग ज्योतिषीय लाभ भी बताते हैं। आज के लोग इसके बारे में न तो पूरा सच जानते हैं और न ही इसको वास्तविकता में मानते हैं। बुजुर्गों की धारणा आज भी यही है कि नाग मणि हुआ करती है। वर्तमान समय में कुछ वेबसाइट भी इसे ऑनलाइन बेच रही हैं। ये दावा भी करती हैं कि उनके यहां से भेजी गई नागमणि असली होती है। इस प्रकार की साइट इनके लिए भारी मूल्य भी लेती हैं

वास्तव में क्या होती है नागमणि –

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नाग मणि वास्तव में क्या होती है। इस बारे में जानने के लिए वैज्ञानिकों ने शोध किया है तथा इस तथ्य का पता लगाया है कि पुराने तथा बड़ी आयु के सांपो के हुड के अंदर पत्थर के समान एक दुर्लभ तत्व पाया जाता है। इसको ही नाग मणि कहा जाता है जो काले या सफेद रंग के सांप 150 से 400 वर्ष तक जीते हैं। सिर्फ उनके अंदर ही यह मणि पाई जाती है। माना यह भी जाता है कि सांप की आयु के साथ ही मणि का आकर भी बढ़ता जाता है। अंधेरे में यह मणि हरे तथा पीले रंग का प्रकाश पैदा करती है। नागमणि वाले सांप ज्यादातर बर्मा तथा श्रीलंका में पाए जाते हैं।

प्राचीन ग्रंथों में हैं प्रमाण –

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नागमणि के प्रमाण हमें कई प्राचीन ग्रंथों में भी मिलते हैं। इससे यह साबित होता है कि यह वास्तव में होती ही है। हमारे बहुत से ग्रंथों में इसका उल्लेख है तथा श्री गरुण पुराण में भी सर्प मणि का उल्लेख किया गया है। इन ग्रंथों में बताया गया है कि इस को यदि गले में धारण किया जाए तो इससे मानव का दुर्भाग्य सौभाग्य में बदल जाता है। वराहमिहिर के ग्रंथों के मुताबिक जो राजा ऐसी मणि को गले में धारण करता है वह सदैव खुश रहता है तथा उसकी प्रजा भी संतुष्ट रहती है। इस प्रकार का राजा सदैव विजय प्राप्त करता है।

वृति सिमिता नामक ग्रंथ में भी इसका उल्लेख है। इस ग्रंथ में कहा गया है कि नाग मणि एक प्रकार का दुर्लभ पत्थर होता था। वैज्ञानिक यह मानते हैं कि जैसा फिल्म आदि में दिखाया जाता है वैसी कोई नागमणि नहीं होती है बल्कि सांप की लार तथा उसकी ग्रंथियां मिलकर एक ठोस अकार ले लेती हैं। इसी को नाग मणि कहा जाता है पर यह रोगजनक हो सकती है।

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