‘शॉकिंग बेबी सिंड्रोम’ कानून में फंसा भारतीय दंपत्ति

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अमेरिका के फोस्टर पेरेंट्स में पल रहा एक दुधमुंहा बच्चा, जो दस दिन में अपनी मां के दूध के लिए तरस रहा है, सबसे बस एक यही सवाल पूछ रहा है कि ‘मेरा क्या कुसूर है। मुझे मेरी मां से मिलाओ’। अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर इस बच्चे के साथ अमेरिका में ऐसा क्या हुआ जो इसे मां-बाप से अलग कर फोस्टर पेरेंट्स में पलने के लिए डाल दिया गया है। बता दें कि अमेरिका में रह रहे एक भारतीय दंपत्ति से एक कानून के तहत इस बच्चे को छीन लिया गया है। अपने बच्चे को पाने के लिए तड़प रहे उसके मां-बाप न्यूजर्सी में कानूनी जंग लड़ रहे हैं।

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अमेरिका में रह रहे इस भारतीय दंपत्ति ने अपने बच्चे को पाने के लिए भारत सरकार से भी मदद की गुहार लगाई है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज तक से अपना बच्चा पाने के लिए मदद की मांग की है। आपको बता दें कि अपने बच्चे से दूर हुए इन पीड़ित मां-बाप का कुसूर बस इतना ही था कि बच्चा मां की गोद से छटक कर गिर गया था। जिसके बाद बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराया गया। बताया जा रहा है कि इस अस्पताल के डॉक्‍टर डिपार्टमेंट ऑफ चाइल्ड प्रोटेक्शन एंड परमानेंसी से जुड़े थे। जिसको लेकर वहां की चाइल्ड केयर सोसाइटी का अब मानना है कि बच्चे को सिर पर काफी चोटें हैं। यह हादसा बच्चे के मां-बाप ने जानबूझकर बच्चे को हानि पहुंचाने के लिए किया है। जिसके तहत बच्चे के माता-पिता पर अमेरिकी कानून की धारा ‘शॉकिंग बेबी सिंड्रोम’ लगा दी गई है और बच्चे को मां-बाप से अलग कर दिया गया है।

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अब इस मामले को लेकर पीड़ित परिवार ने अमेरिका की कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मामले की अगली सुनवाई 16 जनवरी को है। ऐसे में अब देखना यह होगा कि अपने देश की सरकार अमेरिका में बसे इस परिवार की मदद करती है या नहीं।

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