दीपावली – वर्तमान परिप्रेक्ष्य में कैसे और क्यों मनाए

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दीपावली सामान्यतः हिंदू धर्म का त्योहार ही माना जाता है पर सही बात यह है कि इस त्योहार के पीछे एक ऐसा सत्य छुपा है जो हमें “वसुधैव कुटुंबकम” का संदेश देता है और वह सत्य है प्रकाश का, प्रकाश यानी सत्य का प्रतीक जो अंधेरे पर अपनी विजय के रूप में सत्य की विजय दर्शाता है। कौन होगा जो अंधेरे को पसंद करता होगा, कौन होगा जो अंधेरे के प्रतीक रूप असत्य को अपने जीवन का अंग बनाना चाहेगा… शायद कोई नहीं और यही वो चीज है इस दीपावली के पर्व में जो सभी मत-मतान्तरों के लोगों को और सभी धर्मो के लोगों को एक ही माला पिरोती है, प्रकाश की माला में ….सत्य की माला में।

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देखा जाए तो ऐसा कोई भी धर्म या मजहब नहीं है जो की मानवीयता के मार्ग को छोड़ कर लोगों को असत्य की और अग्रसर करें, इसलिए ऐसा कहना कि दीपावली का त्योहार सिर्फ हिंदू धर्म का नहीं है बल्कि सारी मानव जाति का है, अपने में बिलकुल सही कथन है। आज से 50 साल पहले का अंदाजा यदि लगाया जाए तो आज के दौर में परिस्थितियां बहुत ज्यादा बदल गई है, आज के दौर में हम ज्यादा बुद्धिमान और चतुर और हो गए हैं, लेकिन वास्तविकता इससे भिन्न है और वह यह है कि हम जिस बुद्धिमानी की बात करते हैं वह असल में खोखली है, उसमें दूरदर्शिता नहीं है, क्यों ….क्योंकि आज के समय में जब भले ही हम लगातार वैश्विक उन्नति करते जा रहें हैं, तब कहीं न कहीं धरातल के अपने ही लोग और भी नीचे गिरते जा रहें हैं ,कौन लोग, वही जो कुछ आपके घर पर आते थे, मिट्टी के दिए और अन्य वस्तुएं लेकर ताकि आप उनसे खरीदे और उनका जीवन आगे की ओर बढ़ें, पर आज वह नहीं आते, शायद वे भी समझ चुके हैं कि आप अब बुद्धिमान हो गए हो, ज्यादा आधुनिक हो चुके हो, इसलिए अब आप मिट्टी से बनी चीजें न स्वीकार कर पाएंगे। आपकी बुद्धिमानी आपको उतना दूरवर्ती नहीं सोचने दे रही है कि आपके पैसे से आपके किसी भाई का घर दीपावली पर चलता था, आपके पैसे से कोई अपने घर में भी दीपावली मनाता था इसलिए मैंने ऊपर आपकी आधुनिकता को आपकी बुद्धिमानी को “खोखली” कहा है।
तो कहने का मतलब ये हैं कि दीपावली मनाए पर यह भी ध्यान रखें की अपने घर में उजाला करने के चक्कर में आप कहीं उसको तो नहीं भूल गए, जिसके घर में आपके कारण उजाला होता था, तो बेहतर होगा कि यदि बाजार में खरीदारी करते समय हम उन लोगों से भी कुछ लें, जो मिट्टी के सामान के रूप में हमें जीवन की अंतिम वास्तविकता से परिचित करते हैं, मिट्टी से परिचित कराते हैं।

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दूसरी बात देश की सुरक्षा से जुड़ी है, देश के जवान उस समय भी सीमा पर रहते हैं जब आप अपने घर में आराम से निश्चिन्त होकर सोते होते हैं और जब दीपावली पर आप अपने घर में खुशी से दीपक जलाते होंगे तो भी देश के जवान सीमा के अंधेरे में देश की सुरक्षा में तैनात रहते हैं, ताकि आप प्रकाश के त्योहार को मना सकें। हालही में कुछ जवान शहीद भी हुए हैं पर आपने सोचा है कि इस दीपावली पर उन शहीदों के घर में कोई इस प्रकाश के त्योहार को नहीं मना पाएंगे, तो वर्तमान समय में यदि आप एक आदर्श दीपावली मानाना चाहते हैं, तो दो कार्य जरूर करें, पहला किसी भी प्रकार की इलेक्ट्रिक लाइट्स को लाने से बेहतर है कि मिट्टी के दीये और अन्य चीजें खरीद कर किसी अपने भाई की मदद जरूर करें तथा कुछ बेहतर होगा यदि आप अपना कुछ पैसा “आर्मी वेलफेर फंड” में जमा करें, क्योंकि आज के समय में देश के नीचले तबके और सीमा के जवान को देश के हर नागरिक की जरुरत है और यह अच्छा ही है आप इस प्रकार से अपनी दीपावली इन लोगों के साथ शेयर कर मना सकेंगे।
आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी ने अपने लेख में अद्भुत् सत्य कहा है कि, “दीवाली का उत्सव हर साल यह संदेश दुहरा जाता है कि राज्य बदल जाएंगे, राजमुकुट पुराने हो जाएंगे, मठ ढह जाएंगे, संप्रदाय नष्ट हो जाएंगे, बची रहेगी मनुष्य की सामूहिक मंगलेच्छा।”

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