मोदी सरकार की शपथ के बाद राष्ट्रपति भवन में दी गई आलीशान दावत, जानें क्या थे पकवान ?

feast at president house

राष्ट्रपति भवन में मोदी सरकार का शपथग्रहण समारोह कल रात 7 बजे आरंभ हुआ। जिसमें शामिल होने के लिये करीब 8000 मेहमान इकट्ठा हुए। जिनके सम्मान में एक ऐसे राज भोग का इतंजाम किया गया जिसके व्यजनों के बारें में सुनकर आप भी हो जायेगें हैरान। बैसे भी राष्ट्रपति भवन अपने खास व्यजनो के कारण भी जाना जाता है। इस राज भोग डिनर में वहां लजीज डिनर वेज, नॉन वेज भोजन, दाल रायसीना, राजभोग और कई किस्म के व्यंजनों रखे गए। यहां के कई व्यंजन तो खासे हिट रहे हैं।

मोदी सरकार के शपथग्रहण के बाद जिस मैदान में डिनर का इंतजाम किया गया था, वहां राष्ट्पति भवन हमेशा से ही बड़े बड़े भोजों वाले समारोहों की आगवानी करता आ रहा है. शाम सात बजे जब सभी अतिथियों और नव निर्वाचित सांसदों को हाईटी में चाय और यहां के फेमस समोसे दिए गए तो सभी लोग इसका स्वाद चखने के बाद वाह वाही करते थक नही रहे थे।

राष्ट्रपति भवन

राष्ट्रपति हाउस की किचन व्यवस्था

राष्ट्रपति भवन में जब भी किसी बड़ें भोज का आयोजन किया जाता है उसकी व्यवस्था कोई दूसरे लोग नहीं बल्कि राष्ट्रपति हाउस की किचन टीम ही करती है। ये भवन अक्सर बड़े बड़े कार्यक्रमों और खास भोज का गवाह बनता आया है। इसलिये इस भवन में दो किचन का इंतजाम किय़ा गया हैं-एक राष्ट्रपति का निजी किचन और दूसरा राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों के खानपान की जिम्मेदारी निभाने वाला किचन।

राष्ट्रपति भवन

जानें राष्ट्रपति हाउस के किचन के बारें में..

राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों के खानपान की जिम्मेदारी निभाने वाला किचन आकार प्रकार और स्टाफ की क्षमता को देखते हुये बनाया गया है जो किसी पांच सितारा होटलों से कम नही है। यह किचन आधुनिक सुविधाओं से युक्त है। इस किचन का प्रमुख एग्जीक्यूटिव शेफ होता है। जो 45 से 50 लोगों की किचन टीम को लीड करता है। इस बड़े किचन के भी कई सेक्शन बनाये गए हैं, जिसमें मुख्य किचन, बेकर्स, हलवाई, कांटिनेटल और ट्रेनिंग एरिया शामिल हैं।

ये पूरी तरह वातानुकूलित, आधुनिक उपकरणों से युक्त है। किचन की सफाई का काम एक खास टीम करती है, जो हाईजीन उच्च मानदंडों के अनुसार किचन को हमेशा साफ रखती है। यही किचन राष्ट्रपति भवन के सभी आधिकारिक समारोहों, मीटिंग्स, वैंकेट्स, रिसेप्शन, कांफ्रेंस में खानपान का आयोजन करता है।

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समोसे और कचौड़ियों की बात ही खास

राष्ट्रपति भवन के रसोइयों को तरह तरह के व्यंजनों को बनाने की महारत हासिल हैं। बेकरी सेक्शन की बात करें तो यदि वो केक, ब्रेड्स, पिज्जा, डोनट्स, पेस्ट्री आदि को बनाने का विशेषज्ञ है तो भारतीय मिठाइयों का सेक्शन जलेबी, गुलाबजामुन, इमरती, बंगाली मिठाइयां आदि बनाने में महारत हासिल है।  जिन लोगों ने राष्ट्रपति भवन के समारोहों में शिरकत की है, वो बताते हैं कि यहां के समोसे, ढोकले और कचौड़ियों का स्वाद ही बहुत ही लजबाब होता है, अवधी व्यंजनों का भी बोलबालामुर्ग दरबारी, गोश्त थाखनी, दाल रायसीना, कोफ्ता, आलु बुखारा कुछ ऐसे व्यंजन हैं, जिसमें यहां की किचन ने देश के हर पांच सितारा होटलों के पकवानों को भी मात दे रखी है।

सन् 1929 से शुरू हुई लजीज खाने की शुरूआत

इस रसोई में अवधी व्यंजनों का भी बोलबाला रहता है। बैसे यहां के बनाये जाने वाले व्यंजन अलग अलग होने वाले कार्यक्रमों की प्रकृति, आने मेहमानों की प्रकृति, उनके खान पान के तरीकों और पंसद के हिसाब से तैयार किए जाते हैं। जिस देश के मेहमान आते हैं, उसी के हिसाब से याहां के व्यंजनों को भारतीय और कांटिनेंटल व्यंजनों के साथ परोसा जाता है।, यहां ये सिलसिला तब से ही चल रहा है, जब 1929 में ये बनकर तैयार हुआ और यहां वायसराय रहने आए।

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80 के दशक में किचन आधुनिक होनी शुरू हुई

आजादी के बाद भारत के पहले के भारत गवर्नर जनरल सी राजगोपालाचार्य नें मेहमानों की शानदार आगवानी के इस परंपरा को चालू किया था। लेकिन उस समय यह किचन अंग्रेजी स्टाइल की बनी हुई थी। जैसे-जैसे यहां भारत के राष्ट्रपतियों ने अपनी जगह ली, उन्होंने अपनी पसंद और नापसंद के अनुसार व्यंजनों की लिस्ट में फेरबदल करते हुए इसे आगे बढ़ाते गए।

80 के दशक में यह किचन पूरी तरह आधुनिकता की ओर बनना शुरू होने लगी। फिर 90 वें दशक तक पहुचने के बाद सका स्वरूप बदलकर पांच सितारा होटलों की किचन को भी मात देने लगी। इसलिय़े कहा जाता है कि आज के समय में यह किचिन दुनिया के किसी भी बेहतरीन होटल के किचन को कंपटीशन दे सकता है।

खानपान की शैली 

राष्ट्रपति भवन की किचन का कार्यभार अलग अलग तरीको से विभाजित करके उसे काफी अच्छा बना दिया है यहां तक कि राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति का निजी पारिवारिक किचन भी यहां के प्रमुख एग्जीक्यूटिव शेफ की देखरेख में तैयार किया जाता है, जिसमें राष्ट्रपति, उनके परिवार और मेहमानों के खानपान का ध्यान रखा जाता है।

राष्ट्रपति भवन में बनने वाली सब्जियां और मसाले पूरी तरह से प्राकृतिक होते है जो यहां के किचन गार्डन में उगाए जाते हैं, जोकि काफी बड़ा है। यहां अलग अलग तरह सब्जियां और हर्ब्स उगाए जाते हैं, जो पूरी तरह आर्गनिक होते हैं।

हर काम का समय है तय 

राष्ट्रपति भवन की रसोई रोज नई चुनौतियों से गुजरते हुए अपना काम शुरू करती है। हर काम के लिए एक समय निश्चित किया जाता है। उससे एक मिनट इधर या उधर नहीं हो सकता। यहां के सभी काम योजनाबद्ध तरीको से तैयार किये जाते है। नाश्ते से लेकर लंच तक इस किचिन को ना जाने कितनी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। तब कहीं जाकर रसोई के पकवान बनते है। किचन स्टाफ को तब गर्व महसूस होता है जब मेहमान उनके व्यंजनों की तारीफ करते हैं।

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किचन के काम की शुरूआत

यदि रात के कुछ घंटों को छोड़ दिया जाए तो किचन में काम की शुरूआत सुबह से ही शुरू हो जाती है और फिर देर तक चलती रहती है। किचन टीम के लोग रोजाना 15-16 घंटे काम करते है। किसी भी समारोह या औपचारिक वैंकेट की तैयारियां कई दिन पहले शुरू हो जाती हैं। इसके मेनु के लिए प्लानिंग की जाती है। फिर एग्जीक्यूटिव शेफ इस पर मुहर लगाते हैं।

मेनु की मंजूरी के बाद सामग्रियों की लिस्ट स्टोर में भेजी जाती है. इसमें खाद्य सामग्री से लेकर कटलरी, क्राकरी, कांच के सामानों आदि सभी जरूरी चीजों की डिमांड होती है। इसके बाद  दावत का मेनु फाइनल होने के बाद मेनु को राष्ट्रपति भवन के ही प्रिंटिग प्रेस में छपने के लिए भेज दिया जाता है। हालांकि इससे पहले डिजाइन विभाग इसकी विशिष्ट तौर पर डिजाइन भी करता है। खाने से कई घंटे पहले से ही टेबल की सजावट का काम पूरा कर लिया जाता है।

आयोजनों में परोसे जाने वाले खाने को चेक करने के लिए बाकायदा एजेंसी है। राष्ट्रपति और मेहमानों को परोसने से पहले खाने की क्वॉलिटी और सेफ्टी एजेंसियों द्वारा चेक की जाती है।

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यूं तैयार की जाती है खाने की टेबल

भोज से करीब छह से आठ घंटे पहले टेबल तैयार कर ली जाती है। उस पर क्राकरी सज चुकी होती है। टेबल पर खास तरह के फूलों की सजावट कि जाती है। फिर इसमें कई तरह के वेज और नॉन वेज व्यंजनों की बैराइटी के साथ डेजर्ट रखे जाते है। इसके पहले चाय, कॉफी का दौर चलता है। मेहमानों को चलते समय उन्हें पान और माउथ फ्रेशनर दिया जाता है। खाने के दौरान नौसेना के बैंड संगीत की धुनें निकालती है, संगीत की धुनों का कंपोजिशन हिन्दी, अंग्रेजी और संबंधित देश के अनुसार होता है।

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