_ap_ufes{"success":true,"siteUrl":"wahgazab.com","urls":{"Home":"http://wahgazab.com","Category":"http://wahgazab.com/category/uncategorized/","Archive":"http://wahgazab.com/2017/12/","Post":"http://wahgazab.com/know-about-the-amazing-bike-made-with-a-budget-of-13-thousand-and-runs-at-a-speed-of-650kmhr/","Page":"http://wahgazab.com/aadhaar/","Attachment":"http://wahgazab.com/know-about-the-amazing-bike-made-with-a-budget-of-13-thousand-and-runs-at-a-speed-of-650kmhr/know-about-the-amazing-bike-made-with-a-budget-of-13-thousand-and-runs-at-a-speed-cover/","Nav_menu_item":"http://wahgazab.com/37779/","Custom_css":"http://wahgazab.com/flex-mag/","Wpcf7_contact_form":"http://wahgazab.com/?post_type=wpcf7_contact_form&p=38240","Mt_pp":"http://wahgazab.com/?mt_pp=14714"}}_ap_ufee

बिलिमोरा-वाघई नैरो गेज नामक यह ट्रेन हो चुकी है 104 वर्ष की, जानें इसकी रोचक कहानी

बिलिमोरा-वाघई नैरो गेज ट्रेन

 

आपने बहुत सी यात्राएं ट्रेन में की होंगी, पर क्या आपने देश की 104 वर्ष पुरानी ट्रेन में यात्रा की है? यदि नहीं, तो आज हम आपको इस 104 वर्ष पुरानी ट्रेन के बारे में ही जानकारी दे रहें हैं। आपको हम बता दें कि इस ट्रेन का नाम “बिलिमोरा-वाघई नैरो गेज ट्रेन” है। यह ट्रेन भारत के गुजरात राज्य के नवसारी जिले के बिलिमोरा नामक एक छोटे शहर से चल कर गुजरात के दक्षिणी हिस्से वाघई तक जाती है। इस ट्रेन का प्रारंभ गुजरात के गायकवाड राजघराने के राजाओं ने अपने लिए किया था, पर आज यह दक्षिणी रेलवे का हिस्सा है।

बिलिमोरा-वाघई नैरो गेज ट्रेनImage Source:

इस बिलिमोरा-वाघई नैरो गेज नामक ट्रेन का ट्रैक 63 किमी लंबा है और इसकी शुरुआत 1913 में राजा सयाजीरॉव ने ब्रिटिश राज्य के सहयोग से किया था। उस समय यह ट्रेन बड़ौदा स्‍टेट रेलवे के अंतर्गत आती थी। आपको बता दें कि उस समय बड़ौदा गायकवाड राजाओं के नियंत्रण में था। गुजरात को देश के बाकी हिस्से से जोड़ने के कार्य के फलस्वरूप इस ट्रेन की शुरूआत की गई थी। साथी ही गुजरात में सबसे ज्यादा पाई जाने वाली सागवान की लकड़ी को ढोने के कार्य में भी इस ट्रेन का प्रयोग किया जाता था। इस ट्रेन में 5 कोच हैं तथा यह 20 किमी प्रति घंटे के हिसाब से चलती है। इस प्रकार से यह ट्रेन अपनी यात्रा को 3 घंटे 5 मिनट में तय करती है। आपको जानकार हैरानी होगी कि बिलिमोरा-वाघई नामक यह ट्रेन डीजल इंजन आने से पहले स्टीम इंजन से चलती थी और 1937 में इस ट्रेन में डीजल इंजन लगाया गया था। आप इस बात को जानकार चकित होंगे कि यह ट्रेन दिन में 2 बार चलती है पर अपने गंतव्य पर पहुंचने का इसका समय निर्धारित नहीं है। असल में इस ट्रेन के सभी टिकट इसके गार्ड के पास होते हैं और गार्ड उस समय ही ट्रेन को हरी झंडी दिखाता है जब उसके सभी टिकट बिक जाते हैं। इस प्रकार से बिलिमोरा-वाघई नैरो गेज नामक यह ट्रेन अपने आप में एक अलग ही ट्रेन है।

Most Popular

To Top