पीपीएफ और एफडी में क्या है आपके लिए बेहतर?

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आज हर इंसान अपनी बचत से ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाना चाहता है, जिसके लिए वो बचत को या तो बैंक के सेविंग अकाउंट में रखना चाहता है या फिर छोटी योजनाओं में निवेश करता है, लेकिन देखने वाली बात ये है कि ज्यादा फायदा किसमें मिलता है। तो आज आपको बताएंगे कि फिक्स डिपॉजिट यानी (FD) और पीपीएफ (PPF) में से किसमें निवेश करने से ज्यादा फायदा मिल सकता है।

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पहले तो ये जानना ज़रूरी है कि पीपीएफ और एफडी में क्या अंतर है। डाकघर के जरिये संचालित ज्यादातर सभी योजनाओं को छोटी बचत योजना के तौर पर जाना जाता है, दरअसल डाकघर द्वारा संचालित सभी योजनाओं में बैंक डिपाजिट से बेहतर रिटर्न मिलता है, इसी को देखते हुए पीपीएफ (PPF) जैसी कुछ योजनाएं अब बैंकों ने भी शुरू की हैं,  इस जगह पर बैंक बचत की बजाय छोटी बचत योजनाओं से कैसे फायदा होगा उसके बारे में यहां चर्चा करेंगे, इसके अलावा ये भी बताएंगे कि फिक्स डिपॉजिट (FD) और पीपीएफ (PPF) में से निवेश पर किससे ज्या दा फायदा होगा। साथ ही दूसरी छोटी बचत योजनाओं पर भी चर्चा करेंगे यहां पर।

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एफडी या पीपीएफ किसमें है फायदा –

यदि आप कोई बचत स्कीम लेने के बारें में सोच रहे है तो उसमें आपको फायदा मिलने वाले ब्याज से होगा।और इसी ब्याज दर की तुलना करें तो देश का सबसे बड़ा बैंक जो सबसे ज्यादा ऋण देता है वो एसबीआई (SBI) है, लेकिन जानकारों का माना है कि एसबीआई की अपेक्षा जो स्मॉल सेविंग स्कीम्स हैं वो ज्यादा बेहतर हैं, अगर एसबीआई से आपको फिक्स्ड डिपाजिट द्वारा सालाना 5.75 फीसदी से 6.75 फीसदी ब्याज मिलता है, वहीं इसकी अपेक्षा पीपीएफ के रूप में निवेश करने पर आपको 8 फीसदी की दर से ब्याज मिलता है वहीं 5 साल के लिये पोस्ट ऑफिस में डिपाजिट करने पर आपको 7.4 फीसदी की दर से ब्याज मिलता है, और NSC पर आपको 8 प्रतिशत की दर से ब्याज देता है, और इसकी बजाय यदि सुकन्या समृद्धि योजना को देखें तो आपको 8.5 और केवीपी (KVP) पर 7.3 फीसदी ब्याज मिलता है।

पोस्ट ऑफिस में निवेश है मुनाफे का सौदा –

बैंक की एफडी की अपेक्षा डाकघर की कई बचत योजनाएं ऐसी हैं जिनमें टैक्स में काफी छूट मिलता है। मसलन, सार्वजनिक भविष्य निधि (PPF) अकाउंट पर मिलने वाले ब्याज को टैक्स में पूरी तरह छूट दी है, लेकिन अगर बैंक की एफडी से मिलने वाले ब्याज को देखें तो उस पर टैक्स देना पड़ता है।

आम के आम गुठलियों के दाम –

बैंकों में निवेश करने पर फिक्सड डिपाजिट सेक्शन 80C के तहत टैक्स की बचत की स्कीम के साथ भी हैं। पोस्ट ऑफिस द्वारा संचालित PPF, नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट्स और सुकन्या समृद्धि जैसी योजनाएं आपको सेविंग्स में मिलने वाले ब्याज पर टैक्स में छूट देती हैं, ऐसे में जानकार भी यही सुझाते हैं कि बचत के लिए बेहतर विकल्प डाकघर की योजनाएं ही मानी जा सकती हैं। उनसे आपको ज्यादा ब्याज के साथ टैक्स में छूट का फायदा मिलत है।

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वरिष्ठ जनों के लिए बेहतर विकल्प –

अगर इन बचत योजनाओं को सीनियर सिटिजन के नजरिए से देखें तो ये वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी अच्छी स्कीम साबित हो सकती हैं, बैंक डिपाजिट में सीनियर सिटिजन के लिए कोई खास योजना तो नहीं है, पर  वरिष्ठ नागरिक के लिये बनी सेविंग स्कीम प्रतिवर्ष 8.7 फीसदी ब्याज देती है, जो 31 मार्च/ 30 सितंबर/ 31 दिसंबर की जमा राशि की पहली तारीख में और इसके भुगतान होता है।

मंथली इनकम स्कीम काफी अच्छी रिर्टन स्कीम है –

मासिक इनकम चाहने वाले सीनियर सिटिजन के लिए पोस्ट ऑफिस की मासिक आय स्कीम एक बेहतर विकल्प माना जा सकता है। दरअसल इसमें सालाना 8.7 फीसदी ब्याज मिलता है, दूसरी ओर, बैंक की मासिक ब्याज दर भी काफी कम है, जो लोगों को आकर्षित नहीं कर पाता है।

क्या सही क्या गलत है खुद चुनें –

अगर आप ग्राहक को सर्विस देने के साथ दूसरे विषयों को देखें तो बैंक नई तकनीक के साथ संगठित काम करता है लेकिन डाकघर में काम पुराने ढर्रे पर होते हैं, और समय के साथ थकाऊ पेपर वर्क वाला होता है। लेकिन कहते हैं ना कि कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है। इस बात का ज़रूर ध्यान रखें अगर आप बड़ी रकम निवेश कर रहे हैं तो डाकघर की तुलना में बैंक से आपको एक फीसदी कम ब्याज मिलेगा या नुकसान हो सकता है।

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