ट्रिपल तलाक पर बोले मुस्लिम युवा, पहले निकाह तो कराइये

ट्रिपल तलाक

 

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिपल तलाक को बैन कर दिया है, पर इससे सबसे ज्यादा परेशानी उन मुस्लिम लोगों को हो गई, जिनका अभी निकाह तक नहीं हुआ है। जी हां, अपने देश में बहुत बड़ी संख्या ऐसे मुस्लिम युवाओं की है जिनका अभी तक निकाह तक नहीं हुआ है। ऐसे में इन मुस्लिम युवाओं पर ट्रिपल तलाक का सबसे बड़ा असर हुआ है। इन लोगों का कहना है कि हमारा अभी तक निकाह भी नहीं हुआ कि ट्रिपल तलाक को बैन पहले कर दिया गया। अब इन लोगों ने अपनी गुहार सुप्रीम कोर्ट से लगाई है और निकाह कराने की अर्जी दी है।

ऐसे सभी मुस्लिम युवाओं की परेशानी को समझते हुए हमारे संवाददाता पीके गिरपड़े जी पहुंचे नई दिल्ली मेट्रो स्टेशन पर और की इन लोगों से बातचीत। नई दिल्ली मेट्रो स्टेशन पर पीके गिरपड़े जी की बातचीत हुई मौ. रईस से, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट में कुंवारे मुस्लिम युवाओं का निकाह कराने की अर्जी दी है। मौ. रईस का ट्रिपल तलाक पर कहना है कि “बहुत अच्छी बात है। ये तो खत्म होना ही चाहिए था। ये भी अच्छी बात है कि कोर्ट को महिला अधिकारों की फिक्र हो रही है, पर ऐसे लोगों पर भी कोर्ट को ध्यान देना ही चाहिए जिनका अभी निकाह नहीं हो पाया है।”

ट्रिपल तलाकImage Source:

मौ. रईस के साथ में मौ. नजीर भी थे। ये सीलमपुर में फलों का ठेला लगाते हैं। इन्होंने भी कोर्ट में अपने निकाह की अर्जी दी है। अपने दुख को जाहिर करते हुए कहा कि “अजी, सच्ची पुछों तो आज के टाइम में तलाक की टेंशन ना है, बल्कि असल टेंशन तो निकाह की है। अजी कौन ससुर चार चार निकाह कर रिया है। अपने यहां तो एक ही लाले पड़ रहे हैं। इतना बता दूं कि आज के टाइम में कोई ससुर चू@%# ही होगा जो तलाक देगा।”, अपने सफेद बालों पर हाथ फेरते हुए मौ. नजीर ने आगे कहा कि “अब 42 का हो जाऊंगा। सलमान खान तो हूं नहीं। अभी भी केले बेचता ही फिर रिया हूं। कोई खाला या फुफ्फो होती, तो थोड़ा चांस भी होता, पर वो भी नहीं है।”

सुप्रीम कोर्ट में इन लोगों ने जब से अपने निकाह की अर्जियां दी हैं, तब से सुप्रीम कोर्ट भी नई दुविधा में पड़ गया है। चीफ जस्टिस खेहर ने इस मामले के लिए भी 5 जजों की बेंच को गठित किया है और सरकार को ऐसे लोगों के लिए कोई नियम बनाने को कहा है।

विशेष नोट- इस तरह के आलेख से हमारा उद्देश्य केवल आपका मनोरंजन करना है। इसमें मौजूद नाम, संस्था और राजनीतिक पार्टियों की छवि को धूमिल करना हमारा उद्देश्य नहीं है। साथ ही इसमें बताया गया घटनाक्रम मात्र काल्पनिक है। अगर इससे कोई आहत होता है तो हमें बेहद खेद हैं।

To Top