आयुर्वेदिक शराब – शराबबंदी के चलते गुजरात के शिक्षक ने बनाई आयुर्वेदिक शराब

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शराब न सिर्फ किसी व्यक्ति के लिए बल्कि समाज के लिए भी काफी घातक होती है इसलिए ही कई राज्यों में शराब पर बैन लग चुका है। इन्हीं में से एक राज्य है गुजरात, यहां पर शराब पर बैन लगाया गया है जिसके चलते ऐसे लोग जो की शराब की आदत से मजबूर हैं वे काफी परेशान चल रहें हैं, इस कारण गुजरात के एक शिक्षण ने ऐसी शराब का निर्माण किया है जो न सिर्फ आपको शराब के विपरीत असर से बचाती है बल्कि आपका शराब का शौक भी बरकरार रखती है। इस शिक्षक ने इस आयुर्वेदिक शराब को बना कर सभी को चकित कर दिया है तथा अब यह शिक्षक “भूवड़ देशी दारु” नाम से इस शराब की बिक्री का अभियान चला रहा है। अभी तक इस शराब को 200 लोगों ने खरीद लिया है।

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इस शराब को पालीताणा नामक स्थान पर रहने वाले गुजरात के शिक्षक नाथूभाई चावड़ा ने तुलसी, मीठे फल, गौ मूत्र आदि का उपयोग करके इस आयुर्वेदिक शराब का निर्माण किया है। शिक्षक चावड़ा का कहना है कि यह उस नशा करने वाली शराब को छोड़ने का सबसे अच्छा इलाज भी है। शराबी लोगों की मानसिकता को ध्यान में रख कर इस शराब को गांजा, अफीम और दारु का नाम दिया गया है। असल में यह शराब नशे से मुक्ति का एक साधन है, इसको पीने के बाद में करीब 200 लोग शराब पीना छोड़ चुके हैं। इस शराब को बनाने का तरीका भी यह शिक्षक सभी को सिखाता है। इसी प्रकार के इस शिक्षक ने एक आयुर्वेदिक गुटखा भी तैयार किया है जो की गुटखा, तम्बाकू आदि चीजों की आदत को लोगों से छुटकारा दिलाता है। जानकारी के लिए आपको बता दें कि बीते 2 सालों से शिक्षक नाथूभाई लोगों के बीच नशा मुक्ति का अभियान चला रहें हैं।

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