इस बीच का आकार है ॐ की तरह, प्राकृतिक रूप से निर्मित हुआ है यह बीच

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बहुत से स्थानों को प्रकृति खुद ही कलात्मक बना देती है, आज हम आपको एक ऐसे ही स्थान के बारे में जानकारी दे रहें हैं, जहां प्रकृति ने खुद ही बना डाला है। जी हां, आज हम आपको बता रहें हैं बीच के बारे में। बीच आपने काफी देखें ही होंगे, पर आज हम आपको जिस बीच के बारे में बता रहें हैं वह अपनी तरह का एकमात्र बीच है। असल में इस बीच की आकृति हिंदू धर्म के पवित्र चिंह के जैसी ही है, इसलिए यह बीच अपने में एक अलग ही है।

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आपको सबसे पहले हम बता दें कि यह बीच कर्नाटक के गौकर्ण नामक स्थान पर बना है। इस बीच के पास में ही एक आत्मलिंग भी है जिसके साथ में रावण तथा भगवान गणेश की पौराणिक कथा भी जुड़ी हुई है। आपको बता दें कि गौकर्ण नामक स्थान पर महाबलेश्वर का प्रसिद्ध मंदिर है, जहां पर भगवान शिव आत्मलिंग के रूप में स्थापित हैं। महाबलेश्वर नामक इस मंदिर से महज 7 किमी की दूरी पर यह बीच स्थित है।

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आप यदि इस बीच पर जाएंगे तो यह आपको सामान्य ही नजर आएगा, पर यदि किसी पहाड़ पर चढ़कर आप इसको देखेंगे तो आप पाएंगे की यह की आकृति का ही बना है। इस बीच का आकार की आकृति का भले ही है, पर यहां पर अधिकतर विदेशी लोग आते हैं और बीच के किनारे बने हट पर अपनी छुट्टियां बिताते हैं। आपको बता दें कि इस बीच पर अधिकतर फ्रैंच लोग आते हैं। इस बीच को पहाड़ी पर चढ़कर पूरी तरह देखना होता है, तब आप इसकी की आकृति को सही से देख पाएंगे, पर इस पहाड़ी पर चढ़ने का रास्ता काफी खतरनाक है और चढ़ते समय कई लोगों की मौत भी हो चुकी है, इसलिए इस पहाड़ी पर न चढ़ने के लिए चेतावनी लिखा बोर्ड लगाया हुआ है।

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