क्यों आज अधिकतर लोग सौ की उम्र से पहले ही हो जाते हैं मृत्यु को प्यारे, जानें यहां

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वैसे तो शास्त्रों में मानव की उम्र 100 वर्ष बताई गई है लेकिन अब लोग इससे बहुत कम उम्र में ही मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं। इसके पीछे का कारण हमें हिंदू धर्म के महाभारत ग्रंथ में मिलता है। इसमें एक स्थान पर महात्मा विदुर महाराज धृतराष्ट्र को मानव की कम उम्र में ही मौत हो जाने के कारण को बताते हुए एक श्लोक कहते हैं।

श्लोक-

अतिमानोअतिवादश्च तथात्यागो नराधिप।

क्रोधश्चात्मविधित्सा च मित्रद्रोहश्च तानि षट्।।

एत एवासयस्तीक्ष्णा: कृन्तन्यायूंषि देहिनाम्।

एतानि मानवान् घ्नन्ति न मृत्युर्भद्रमस्तु ते।।

इस श्लोक में कई तथ्य ऐसे बताये गए हैं जो मानव की कम उम्र होने के लिए जिम्मेदार हैं। हम उन सभी तथ्यों को यहां आपके सामने रख रहें हैं। आइये जानते हैं इन तत्यों के बारे में।

1- गुस्सा करना

गुस्सा करना Image source:

गुस्सा यानि क्रोध मानव का बहुत बड़ा दुश्मन माना जाता है। गुस्सा आने पर लोग वह काम कर जाते हैं। जिससे उनका ही नुकसान होता है। अत्यधिक गुस्सा करने से मानव की आयु भी घटती है। अतः क्रोध से बचे रहें।

2- लालच करना

लालच करना Image source:

लालच भी मानव के जीवन का दुश्मन कहा जाता है, जो व्यक्ति लालच करता है। उसकी उम्र घटने लगती है।

3- अभिमान करना

अभिमान करना Image source:

अभिमान करने वाला व्यक्ति खुद को ही सबसे बड़ा तथा समझदार मानता है। अभिमान करने वाला व्यक्ति खुद की प्रशंसा करता है। ऐसे व्यक्ति की उम्र स्वतः घटने लगती है।

4- मित्रों को धोखा देना

मित्रों को धोखा देना Image source:

अपने मित्रों या विश्वासी लोगों के साथ विश्वासघात करना एक महापाप माना गया है। जो व्यक्ति ऐसा करता है, उसकी मृत्यु जल्दी होती है।

5- त्याग की भावना का न होना

त्याग की भावना का न होना Image source:

जो व्यक्ति समाज में सुख शांति से रहना चाहता है। उसमें त्याग तथा समर्पण की भावना होनी चाहिए। जिसके अंदर ये गुण नहीं होते उसकी उम्र घट जाती है।

6- ज्यादा बोलने वाला व्यक्ति

ज्यादा बोलने वाला व्यक्ति Image source:

जो व्यक्ति ज्यादा तथा व्यर्थ बोलता है। वह कभी कभी ऐसी चीजें बोल जाता है जिससे आगे चलकर उसे हानि होती है। ज्यादा बोलने से मानव की उम्र भी कम होती है। अतः इन सभी तथ्यों को आप जानकर अपने जीवन में उतारे तथा अपनी लंबी उम्र को आनंद से गुजारें।

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किसी भी लेखक का संसार उसके विचार होते है, जिन्हे वो कागज़ पर कलम के माध्यम से प्रगट करता है। मुझे पढ़ना ही मुझे जानना है। श्री= [प्रेम,शांति, ऐश्वर्यता]

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