इस मंदिर में है दिव्य शिवलिंग, स्वयं ही बदल लेता है आकार

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भगवान शिव के बहुत से मंदिर दुनियाभर में हैं लेकिन क्या आप किसी ऐसे शिव मंदिर के बारे में जानते हैं। जिसके दिव्य शिवलिंग का आकार स्वयं ही बदल जाता है। आज हम आपको एक ऐसे ही मंदिर से रूबरू करा रहें हैं। इस शिवालय का नाम “तिल भांडेश्वर महादेव” है। यह मंदिर भगवान शिव की ससुराल कनखल (हरिद्वार) में स्थित है। इस मंदिर में जो शिवलिंग है। उसका आकार स्वयं ही बदल जाता है। यही यहां के शिवलिंग की खूबी है। इस मंदिर के बारे में   यह मान्यता भी है की यहां पर जल में तिल डालकर यदि एक माह तक एक ही समय में शिवलिंग पर जलाभिषेक किया जाए तो मनोकामना की पूर्ति अवश्य होती है। इस मंदिर के बारे में एक पौराणिक मान्यता भी है। कहा जाता है की जब देवी सती ने यज्ञ कुंड में खुद को दाह कर डाला था तब भगवान शिव ने दक्ष प्रजापति के महल में प्रवेश करने से पहले इस मंदिर वाले स्थान पर ही खुद तिल के आकार में परिवर्तित किया था। यही कारण है की इस मंदिर को ” तिल भांडेश्वर महादेव” के नाम से जाना जाता है।

यह है मंदिर का इतिहास –

यह है मंदिर का इतिहासImage source:

आपको बता दें की यह मंदिर अति प्राचीन है। इस मंदिर में सन 1865 से भी पूर्व समय से पूजा उपासना की जा रही है। सन 1970 में यह मंदिर एक वृद्ध पुजारी की देखरेख में था लेकिन उस समय पुजारी के निवास के लिए मंदिर के आसपास भी कोई स्थान नहीं था। इसके बाद भक्त लोगों ने त्रिवेणीदास महाराज से इस मंदिर की देखरेख की जिम्मेदारी लेने की प्रार्थना की। त्रिवेणीदास महाराज ने अपने समय में इस मंदिर की उचित देखरेख की। सन 1972 के समय से इस मंदिर में गर्भगृह का जीर्णोद्धार, चहार दीवारी, फर्श का निर्माण आदि कार्य संपन्न हुए। सन 1987 के समय में तिल भांडेश्वर महादेव के परिसर में कुछ कमरों का निर्माण भी किया गया।

ब्रह्मलीन महंत हंसदास महाराज ने इस मंदिर में ही 19 वीं शताब्दी में भगवान शिव की उपासना तथा कठोर तपस्या की संपन्न की थी। इस समय तक किसी को ज्ञात नहीं था की यह शिवलिंग स्वयं ही बढ़ता या घटता है। तिल भांडेश्वर महादेव मंदिर में पंडित मोतीराम अल्हड़ ने भी गायत्री साधना की और प्रतिदिन शिवलिंग को जनेऊ से नापा करते थे। उसी समय तिल भांडेश्वर महादेव मंदिर के शिवलिंग के घटने और बढ़ने के राज का पता लगा। पंडित मोतीराम ने बताया की कृष्ण पक्ष में यह दिव्य शिवलिंग तिल तिल घटता है और कृष्ण पक्ष में तिल तिल बढ़ता है। आज भी दिन में सुबह शाम यहां पूजन किया जाता है। बहुत से लोग इस दिव्य शिवलिंग के दर्शन के लिए आते रहते हैं।

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किसी भी लेखक का संसार उसके विचार होते है, जिन्हे वो कागज़ पर कलम के माध्यम से प्रगट करता है। मुझे पढ़ना ही मुझे जानना है। श्री= [प्रेम,शांति, ऐश्वर्यता]

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