गणेश चतुर्थी पर जानिए भगवान गणेश के पूजन का महात्मय और कथा

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हिन्दू धर्म में गणेश चतुर्थी का बहुत महत्त्व है। इसी दिन ही भगवान गणेश का जन्म हुआ था। आज के दिन गणपति का पूजन करने से लोगों की हर मनोकामनाएं पूरी होती हैं, इसलिए हम आपके लिए लाएं हैं भगवान गणेश के पूजन की सही विधि और पौराणिक कथा। आपको हम बता दें कि भगवान गणेश का जन्म भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को हुआ था, इसलिए इसको गणेश चतुर्थी कहा जाता है। हिंदू धर्म ग्रंथों की मानें तो हर माह की चतुर्थी को भगवान गणेश के भिन्न भिन्न स्वरुप का पूजन किया जाता है, पर भाद्रपद माह की चतुर्थी को भगवान गणेश का पूजन करने का विशेष महात्मय होता है, क्योंकि इस दिन ही भगवान गणेश का आविर्भाव हुआ था। महाराष्ट्र सहित देश के कई राज्यों में आज के दिन ही भगवान गणेश का विशेष उत्सव प्रारम्भ हो जाता है। यह उत्सव 10 दिन तक चलता है और 10 दिन बाद में भगवान गणेश का विसर्जन किया जाता है। गणेश चतुर्थी के दिन ही सभी भक्त भगवान गणेश के लिए व्रत रखते हैं और जीवन में आने वाले सभी विघ्नों को समाप्त करने की कामना करते हैं।

भगवान गणेशImage Source: 

पूजन विधि –

भगवान गणेश का गणेश चतुर्थी पर पूजन करने का विशेष महात्मय बताया गया है, इसलिए हम यहां आपको बता रहें हैं भगवान गणेश की सही पूजन विधि। आप इस दिन सुबह स्नान आदि करके अपने घर चौकी सजाएं तथा उस पर एक लाल कपड़ा बिछा दें। जल, सिंदूर, रोली, अक्षत, दूब और फूलों की माला लेकर भगवान गणेश को अर्पित करें तथा उनका पूजन करें। इसी दौरान गणेश चालीसा का पाठ भी कर सकते हैं। इसके बाद भगवान गणेश के प्रिय भोग मोदक और लड्डू का भोग उन्हें अर्पित करें तथा इसके बाद आरती करें। अब आप भगवान गणेश से क्षमा प्रार्थना करें तथा जीवन में आने वाले सभी विघ्नों को दूर करने की कामना करें।

भगवान गणेशImage Source: 

क्या है गणेश चतुर्थी की पौराणिक कथा –

भगवान गणेश की उत्पत्ति की कथा शिव महापुराण में मिलती है। इस कथा के अनुसार एक बार देवी पार्वती स्नान करने के लिए गई थी। उस समय उनके उबटन के मेल से एक बालक का जन्म हुआ। जो की भगवान गणेश थे। उन्होंने इस बालक को दरवाजे पर बैठा दिया और कहा कि जब तक मैं स्नान न कर लूं तब तक यहां कोई न आए। कुछ समय बाद जब भगवान शिव वहां आए तो भगवान गणेश ने उनको रोक दिया। इस पर भगवान शिव को बहुत क्रोध आया और उन्होंने भगवान गणेश का सिर त्रिशूल से काट डाला। इस घटना के बाद में देवी पार्वती बहुत दुखी हुई और भगवान शिव को जब यथा स्थिति का बोध हुआ, तब उन्होंने एक हाथी के बच्चे का सिर लगाकर भगवान गणेश को जीवित कर दिया। उसी समय से भगवान गणेश का नाम “गजानन” भी पड़ गया। इस दिन भाद्रपद माह की चतुर्थी थी, इसलिए इस दिन को गणेश चतुर्थी कहा जाता है। आपके परिवार पर भगवान गणेश की कृपा सदैव बनी रहें। इस मंगल कामना सहित “वाह गज़ब” परिवार आपको गणेश चतुर्थी की हार्दिक बधाई प्रेषित करता है।

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किसी भी लेखक का संसार उसके विचार होते है, जिन्हे वो कागज़ पर कलम के माध्यम से प्रगट करता है। मुझे पढ़ना ही मुझे जानना है। श्री= [प्रेम,शांति, ऐश्वर्यता]

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