लो भईया, अब सुसु करने पर भी लगने लगा है GST और पार्सल चार्ज

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कई बार इस प्रकार की खबरें देखने व पढ़ने में आती हैं जिन्हें जानने के बाद हर कोई हैरान रह जाता है। कई बार जब हम खबरों को सही से समझते हैं तो खुद ही आश्चर्य करने लगते की ऐसा आखिर कैसे हो सकता है। बात यदि सुसु करने की हैं तो पुरुष समाज की और बात है पर महिला को इस प्रकार की परिस्थिति में परेशानी होती ही है। कुछ इसी तरह की स्थिति को ध्यान में रख कर की बहुत सी राज्यों की सरकार ने यह नियम बनाया है कि महिलायें किसी भी होटल या रेस्टोरेंट में टॉयलेट का निःशुल्क उपयोग कर सकती हैं। मगर सोचिए की अगर कोई रेस्टोरेंट आपसे टॉयलेट का बिल लें वह भी GST लगाकर तो यह बात काफी पेचीदा सी लगती है। आजकल हर चीज पर GST लग रहा है, मगर यह तो हद ही हो गई कि पेशाब करने पर भी GST लगाकर आपको बाकायदा बिल देना पड़े।

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जी हां अपने ही देश से एक ऐसा मामला सामने आया है। जिसमें एक व्यक्ति को रेस्टोरेंट मालिक ने टॉयलेट यूज करने का बिल बाकायदा GST तथा पार्सल चार्ज जोड़ कर दिया। शुलभ शौचालय में आपने भी कभी न कभी सुसु किया ही होगा। वहां 2 रुपये लगते हैं, वह भी मेंटिनेंस चार्ज के। वो एक प्रकार की सेवा ही होती है जो प्रत्येक व्यक्ति द्वारा सुविधा शुल्क के रूप में दी जाती है, पर यदि सुसु करने पर भी कोई जीएसटी लगाएं तो बात वायरल होनी ही है।

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हालही में अपने देश के तमिलनाडू की Erode सिटी के “Rukhmani Ammal Food”  नामक रेस्टोरेंट में सुसु करने का 11 रुपये का बिल बनाकर उससे पैसे लिए गए, वो भी जीएसटी तथा पार्सल चार्ज जोड़कर। यह बिल व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर डाल दिया। सोशल मीडिया पर बिल की तस्वीर आते ही वह वायरल हो गई और सूस करने पर लगे जीएसटी चार्ज को देखकर आम जनता के पसीने छूट गए। आपको बता दें कि इस बिल में 10 रुपये टॉयलेट यूज करने का चार्ज तथा और 26 पैसे स्टेट जी.एस.टी लगाया गया था। इसके अलावा इस बिल में 50 पैसे पार्सल चार्ज भी लगाया गया था। कुल मिलाकर व्यक्ति को रेस्टोरेंट का टायलेट यूज करने पर 11 रुपये का बिल दिया गया था। अब जहां तक बात जीएसटी की है वो समझ भी आता है पर ये पार्सल चार्ज क्या है भाई। कौन सा पार्सल और किस बात का पार्सल चार्ज।

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2017 में दिल्ली में कुछ रेस्टोरेंट ने यह फैसला लिया था कि उनके यहां महिलाएं तथा बच्चे निःशुल्क टॉयलेट का यूज कर सकते हैं। इसके बाद कर्नाटक राज्य के कुछ रेस्टोरेंट ने भी जनहित में ऐसा ही फैसला लिया। इन सभी का कहना था कि हमारे यहां बिना खाएं या कुछ खरीदे कोई भी महिला या बच्चा टॉयलेट को निःशुल्क यूज कर सकते है। असल में ऐसा होना भी चाहिए क्योंकि ये सभी आदमी की बेसिक नीड हैं और ऐसा कार्य मानवीयता के अंतर्गत आता है। लेकिन यदि टॉयलेट के साथ जीएसटी तथा पार्सल चार्ज लगाया जाएं तब बात समझ से बाहर हो जाती है।   

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किसी भी लेखक का संसार उसके विचार होते है, जिन्हे वो कागज़ पर कलम के माध्यम से प्रगट करता है। मुझे पढ़ना ही मुझे जानना है। श्री= [प्रेम,शांति, ऐश्वर्यता]

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