यहां ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए गाइनेकोलॉजिस्ट से लेनी पड़ती है क्लीन चिट

ड्राइविंग लाइसेंस

जैसा कि आप जानते ही है कि हर देश के अपने अलग कानून होते है। जिनका पालन करना उस देश के हर नागरिक का कर्तव्य होता है। अगर वाहन चलाने की बात की जाए तो इसके लिए ड्रायविंग लाइसेंस की जरुरत पड़ती है और ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आपको कुछ टेस्ट ऐसे देने पड़ते है जिनमे पास होने के बाद ही आपको गाड़ी चलाने योग्य समझा जाता है। जहां तक हमारे देश की बात करें तो यहां पर लाइसेंस बनवाने के लिए लोगों को बाइक व गाड़ी को चलाने का एक परिक्षण टेस्ट देना पड़ता है। इसी तरह दुनिया के अन्य देशों में भी लोगों को कुछ टेस्ट देने पड़ते है मगर यह हमारे देश से काफी अलग है। इतने अलग की कुछ के बारे में जानकर तो आप दंग ही रह जाएंगे। चलिए जानते है दुनिया के अलग देशों के इन अलग कानूनों के बारे में।

यूरोप

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अगर यूरोप की बात करें तो अगर यहां किसी महिला को ड्राइविंग लाइसेंस लेना है तो उन्हें पहले गाइनेकोलॉजिस्ट के पास जाकर कलिरेंस लेनी पड़ती है। डाक्टर से क्लिन चिट मिलने के बाद ही वह लाइसेंस अप्लाइ कर पाती है।

ऐसा कानून बनने की वजह –

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यूरोप का यह कानून साल 2002 में बनाया गया था। इस टेस्ट को कराना अनिवार्य इसलिए किया गया था क्योंकि इससे पता चल जाता था कि महिला किसी बीमारी से ग्रस्त तो नही है। हालांकि इस कानून पर लंबे समय तक चर्चा चली क्योंकि पुरुषों के लिए इस तरह का कोई टेस्ट अनिवार्य नही था। एक लंबे विरोध के बाद आखिरकार इस कानून को हटा दिया गया।

ब्राजील

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अगर ब्राजील की बात करें तो यहां पर अगर किसी महिला को ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना है तो उसे अपना सेल्फ डिफैंस करना आना चाहिए। ब्राजील में लाइसेंस बनवाने के लिए यह अनिवार्य है।

हंगरी

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हंगरी में अगर किसी भी शख्स को अपना लाइसेंस बनवाना है तो उसका फर्स्ट ऐड कोर्स किया होना बेहद जरुरी है। हंगरी की सरकार का मानना है वाहन चलाते समय कभी भी कोई घटना घट सकती है ऐसे में प्रत्येक वाहन चालक को फर्स्ट ऐड का ज्ञान होना जरुरी है ताकि वह अपनी और किसी दूसरे की सहायता कर सके।

साउथ डकोटा

साउथ डकोटाImage source:

कि हमारे देश की तुलना में 4 साल कम है। यहां पर 14 साल के बाद कोई भी बच्चा लाइसेंस बनवा कर गाड़ी चला सकता है।

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