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पहाड़ों को चीरकर बनाया गया था 500 साल पुराना “नीमराना किला”

neemrana

हमारे भारत देश में कई ऐतिहासिक इमारते हैं जो लोगों के लिए आकर्षण का केन्द्र बनी हुई है। जिसे देखने मात्र के लिए दूर देश के लोग भी खींचे चले आते हैं। इन्हीं में से एक है अरावली की पहाडियों पर बना 552 साल पुराना नीमराना किला। जो आज के समय में भारत की सबसे आकर्षित और खूबसूरत ऐतिहासिक इमारतों में से एक माना जाता है। इस किले की खासियत यह है कि इसका निर्माण सन् 1464 में पहाड़ों को चीरकर कराया गया था।

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जयपुर के संगनेर एयरपोर्ट से 136 किमी दूर पर बना यह विशाल किला तीन एकड़ में फैली अरावली पहाड़ियों को काट कर बनाया गया है। यही कारण है कि इस महल तक पहुंचने के लिए पहाड़ों पर चढ़ना काफी दुर्लभ भरा काम है। इस किले से कई बड़े राजाओं की गाथाएं जुड़ी हुई है। इस महल को कभी पृथ्वीराज चौहान के वंशजों ने अपनी राजधानी बनाने के लिए चुना था। पृथ्वीराज चौहान की मृत्यु के बाद चौहान वंश के राजा राजदेव ने इस किले पर अपना कब्जा कर लिया था, यहां का शासक मियो बहादुर शासक था। लेकिन चौहानों से युद्ध में हार जाने के बाद मियो ने उनसे आग्रह किया कि इस किले को उसका नाम दे दिया जाए, और तभी से इस किले को नीमराना के नाम से जाने जानें लगा।
दस मंजिलों पर बने इस किले में कुल 50 कमरे है लेकिन 1986 में इस किले को हेरिटेज रिजॉर्ट के रूप में तब्दील कर दिया गया और आज के समय में इस नीमराना महल में कई सुंदर रेस्त्रां बनाए गए हैं। यहां की सजावट को देखकर आज भी राजसी ठाठ का अनुभव होता है।

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