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स्कूल न होने पर कब्रिस्तान में बैठ कर बच्चे कर रहें हैं पढ़ाई, प्रसाशन ने नहीं की मदद

Students are bound to sit at the cemetery to study as no schools are there cover

आपने स्कूल में पढ़ते हुए बच्चों को देखा ही होगा, पर क्या आप कभी सोच सकते हैं कि अपने देश में एक ऐसा स्थान भी हैं जहां पर बच्चे कब्रिस्तान में बैठ कर पढ़ाई करते हैं? यदि नहीं, तो आज हम आपको अपने देश के ही उस स्थान से रूबरू करा रहें हैं, जहां आप ऐसा दृश्य अपनी आंखों से देख सकते हैं। यह स्थान है राजस्थान का धौलपुर। आपको बता दें कि धौलपुर जिले के एक सरकारी मदरसे में इतनी भी सुविधा नहीं है कि वहां पढ़ने वाले बच्चे सही से बैठकर पढ़ सकें, इसलिए आज ये बच्चे अपनी पढ़ाई कब्रिस्तान में बैठकर करने को मजबूर हैं। हैरान करने वाली बात यह भी है कि इन बच्चों को मिड डे मील भी इस कब्रिस्तान में ही मिलती है।

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यह मदरसा 5 वीं क्लास तक है, लेकिन कब्रिस्तान में पढ़ाई होने की वजह से ही यहां के बच्चों की संख्या घट गई है और अब इस मदरसे में महज 50 बच्चे ही रह गए हैं। इस मदरसे की कमेटी के सदस्य अकबर खान कहते हैं कि बच्चों का कब्रिस्तान में पढ़ना बहुत अच्छी स्थिति को नहीं दर्शाता है और यह स्थिति उस समय और भी ज्यादा खराब हो जाती है, जब यहां कोई शव दफनाने के लिए लाया जाता है। उस समय बच्चों के चेहरे पर अलग ही खौफ देखने को मिलता है।

अकबर खान बताते हैं कि मदरसे की जमीन के आवंटन के लिए हम लोगों ने जिला कलेक्टर से लेकर मंत्री तक को ज्ञापन दिया है, पर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है। जिले के उपखंड अधिकारी विनोद मीणा का कहना है कि अभी तक उनको कोई शिकायत नहीं मिली थी, अब शिकायत उनके सामने आई है तो अब वो इसको लेकर उच्च अधिकारियों तक जरूर जाएंगे। अब देखना यह है कि प्रसाशन इन बच्चों की मदद करता है या नहीं। हम लोगों के देश में जहां स्कूल को शिक्षा का मंदिर कहा जाता है वहां इस प्रकार की स्थिति देश की सांस्कृतिक मूल्यों को गिराती ही नजर आती है, इसलिए अच्छा होगा कि इस प्रकार की स्थिति को जल्द से जल्द सुधारा जाए।

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