ताबूत जितनी जगह पर जिंदगी गुजारने पर मजबूर हैं यहां के लोग, जानें क्यों

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कभी-कभी इंसान ऐसा जीवन जीने पर मजबूर हो जाता है जिसको देख कर सभी लोग हैरान रह जाते हैं। आज हम आपको एक शानदार शहर के पीछे छिपे असल चेहरे को यहां दिखा रहें। इसको देखने के बाद आप यह अच्छे से समझ जाएंगे कि जो कुछ आप अपनी आंखों से देखते हैं असल में वही सब कुछ नहीं, उसके पीछे भी बहुत कुछ होता है जिसको हम देख नहीं पाते हैं। दुनिया भर के बेहतरीन शहरों की जब कभी भी बात होती है, तो हांगकांग का नाम भी जरूर आता है। हांगकांग अपनी जीवन शैली, गगनचुंबी इमारतों और लाइट्स की वजह से दुनियाभर में लोकप्रिय है, लेकिन असल में जैसा आप इसको समझते हैं यह वैसा है नहीं।

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हाल ही में “बेनी लैम” नामक एक स्थानीय फोटोग्राफर ने हांगकांग के असल चेहरे के पीछे छिपी कुछ तस्वीरों को सांझा किया है। बेनी लैम ने अपने अनुभव को नेशनल जियोग्राफिक के साथ भी सांझा किया है। बेनी लैम एक फेमस फोटोग्राफर है और कई विज्ञापन एजेंसियों तथा अंतर्राष्ट्रीय ब्रांड्स के साथ में काम करते हैं।

बेनी लैम ने हांगकांग की गली-गली में घूम कर कुछ तस्वीरों को लिया है, जिनमें लोग काफी पिछड़े और ताबूत जितने स्थान पर भी अपना जीवन गुजारते पाए गए है। बताया जाता है कि पिछले 10 वर्षों में हांगकांग में यही हालात हैं। तस्वीरों में दिखाया गया है कि महज 15 फिट के घर में जीवन गुजार रहें हैं। बेनी लैम का उद्देश्य इन चकाचौंध के जीवन से बाहर रहने वाले लोगों की जिंदगी में रोशनी डालना था। असल में लोग यह समझते हैं कि इनका हमारे जन जीवन में कोई योगदान नहीं है, पर असल योगदान इन लोगों का ही हमारे जीवन में हैं।

ये वही लोग हैं जो किसी रेस्त्रां में बैरा का काम करते हैं या बनती सड़क पर मजदूर का। बेनी लैम का कहना है कि उनमें और हममें सिर्फ मकान का ही फर्क है वह ताबूतनुमा छोटे से घर में रहते हैं और हम लोग बड़े घर में पर, घर तो घर ही होता है वह चाहे ताबूतनुमा हो या आलिशान बंगला। यही वजह है कि ये लोग अपने इस 15 फिट के लकड़ी एक घर को किसी महल से कम नहीं समझते हैं।

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