_ap_ufes{"success":true,"siteUrl":"wahgazab.com","urls":{"Home":"http://wahgazab.com","Category":"http://wahgazab.com/category/uncategorized/","Archive":"http://wahgazab.com/2017/05/","Post":"http://wahgazab.com/a-child-born-from-the-womb-of-a-dead-woman-four-months-back/","Page":"http://wahgazab.com/addd/","Attachment":"http://wahgazab.com/a-child-born-from-the-womb-of-a-dead-woman-four-months-back/dead-mother-give-birth-to-child1/","Nav_menu_item":"http://wahgazab.com/28118/","Wpcf7_contact_form":"http://wahgazab.com/?post_type=wpcf7_contact_form&p=154","Mt_pp":"http://wahgazab.com/?mt_pp=14714"}}_ap_ufee

दरगाह – यहां मुस्लिम लोग प्रतिवर्ष धूमधाम से मनाते हैं कृष्ण जन्माष्टमी

भारत एक ऐसा देश है जहां पर संसार के सभी तरह के धर्म से जुड़े लोग रहते हैं, यह एक सांझा संस्कृति का देश है। जहां पर सभी लोग एक दूसरे की ख़ुशी और दुःख में सामान रूप से शामिल होते हैं। अपने इस देश में ऐसी कई जगह हैं जहां पर लोग किसी भी प्रकार की कट्टरवादिता वाली मानसिकता से ऊपर उठ कर के दूसरे के त्यौहारो को मिलजुल कर मनाते हैं। आज हम आपको इन्हीं जगहों में से एक दरगाह के बारे में बताने जा रहें हैं, जहां पर सभी लोग मिलजुल कर कृष्ण जन्माष्टमी को प्रतिवर्ष मनाते हैं।

janamastami utsav1Image Source:

इस दरगाह का नाम है “नरहर दरगाह”, यह दरगाह राजस्थान के जयपुर से करीब 200 किमी डडौर झुंझुनू जिले में स्थित चिड़ावा नामक जगह पर स्थित है। इस दरगाह को शरीफ हजरत हाजिब शकरबार दरगाह भी कहते हैं। यहां पर आप मुस्लिम समुदाय के लोगों को कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाते हुए देख सकते हैं। यहां के मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखने वाले लोग प्रतिवर्ष इस त्यौहार को बहुत धूमधाम से दरगाह परिसर में मनाते हैं।

janamastami utsav2Image Source:

बहुत कम लोग जानते हैं कि इस दरगाह पर कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व पिछले 300 सालों से लगातर मनाया जा रहा है, यहां पर कृष्ण जन्माष्टमी का यह पर्व लगातार 3 दिन तक मनाया जाता है। इस उत्सव में हर धर्म के लोग शिरकत करते हैं और यह कार्यक्रम सभी धर्मो में समन्वय बनाने के उद्देश्य से किया जाता है। इस उत्सव में हिंदू-मुस्लिम के साथ में सिक्ख लोग भी बड़ी संख्या में भाग लेते हैं। हालांकि यहां के स्थानीय लोगों को इस बात की सही जानकारी नहीं है कि यह उत्सव कब से मनाया जा रहा है फिर भी कई लोग इसको 300 से 400 साल के मध्य से मनाया जाने वाला बताते हैं। कृष्ण जन्माष्टमी के पर्व पर दरगाह के आसपास करीब 300 से 400 दुकाने सज जाती है जिससे वहां पर मेले जैसा ही माहौल बन जाता है।

janamastami utsav3Image Source:

इस दरगाह के बारे में मान्यता है कि इसके गुम्बद से पहले शक्कर बरसती थी इसलिए ही इस दरगाह को “दरगाह शक्कर बाबा” के नाम से भी लोग जानते हैं। माना जाता है कि शक्कर बाबा, संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के समकालीन ही थे। शक्कर बाबा ने अजमेर के ख्वाजा चिश्ती साहब के 57 वर्ष बाद में अपना देहत्याग किया था। जन्माष्टमी के पर्व पर यहां हर मजहब के लोग आते हैं और बहुत से लोग भारत के अलग-अलग राज्यों जैसे हरियाणा, पश्चिम बंगाल, बिहार, महाराष्ट्र आदि से आते हैं।

 

Most Popular

To Top