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मुगल शासक अकबर ने भी मानी गंगाजल की महिमा

मुगलों की राज शाही की बात करें, तो इनके जलवे काफी निराले और रंंगीनमिजाज हुआ करते थे, ये लोग ज्यादातर अपनी शान के लिए ही पहचाने जाते हैं। उन्हीं मुगल शासक में से एक थे बादशाह अकबर, जिनके बारे में कई कहानियां काफी मशहूर हैं। जिसमें जोधा-अकबर से संबंधित प्रेम कहानी, तो बेहद ही मशहूर है। लोगों के अनुसार इन्होंने जोधाबाई से शादी करने के बाद काफी जनकल्याण के कार्य करना शुरू कर दिए थे। देश की कला एवं संस्कृति के साथ अकबर को भारतीय चित्रकारी एवं ललित कलाओं में गहन रुचि थी।

शुरू में बादशाह अकबर हिन्दुओं के लिए सहिष्णु नहीं थे लेकिन समय के परिवर्तन के साथ उन्होनें हिन्दूओं के धर्म के प्रति भी रूचि दिखाना शुरू कर दी थी। यहां तक कि उन्होंने अपनी भाषा के अनेक ग्रंथों का अनुवाद हिन्दी और संस्कृत में भी करवाया था। इसी तरह से अकबर से जुड़ी और भी ऐसी बातें है जिनके बारे में आप नहीं जानते होंगे।

हमारे भारत की सबसे पवित्र नदी गंगा जिसके जल को पीने के लिए लोग दूर-दूर से लोग आते है और अपनी आत्मा को शुद्ध करते है। पर क्या आप जानते हैं कि इसी गंगा जल को पीकर ही अकबर अपनी प्यास बुझाते थे। ये बात शायद बहुत ही कम लोग जानते होंगे। भोजन करने के बाद अकबर हमेशा गंगाजल का ही सेवन कर अपनी प्यास बुझाते थें। इसके लिए उन्होंने एक अलग सेना ही लगा दी थी, जिससे पानी के कमी उनके पास ना हो पाए। वहां के सैनिक दिन-रात इसी काम में लगे रहते थे। इतिहासकारों से मिली जानकारी के अनुसार अकबर का जो महल था वहां से गंगा नदी दूर थी, इसलिए गंगाजल लाने के लिए अकबर ने खास सेना की तैयार करके रखी थी। अकबर गंगाजल के अलावा किसी अन्य पानी के ग्रहण नहीं करते थे, इस कारण अकबर ने अपने अंतिम दौर तक गंगा जल को ही पिया था।

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