सबके जीवन में खुशियों का नया उजाला लेकर आ गई लोहड़ी

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लो आ गई लोहड़ी वे, बना लो जोड़ी वे…, सुंदरिए-मुंदरिए हो, तेरा कोन विचारा हो, दुल्ला भट्टी वाला हो..जैसे पारंपरिक गीत-संगीत के साथ लोहड़ी के इस पर्व की शुरूआत हो गई है। बच्चे आज जहां घर-घर जाकर लोहड़ी मांग रहे हैं, वहीं लोग मूंगफली, गजक और रेवड़ी का जमकर आनंद भी उठा रहे हैं। जैसे-जैसे सूरज ढलना शुरू होगा वैसे-वैसे लोहड़ी जलाना भी शुरू कर दिया जाएगा। चारो ओर लोग ढोल-नगाड़ों की तान पर जमकर भंगड़ा करते हुए नजर आएंगे।

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वैसे तो हर साल 13 जनवरी को यह त्योहार देश में काफी धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन उत्तर भारत के पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और जम्मू कश्मीर में लोहड़ी का एक अलग ही उत्साह देखने को मिलता है। जिसमें सभी लोग एक साथ नाच गाकर अपनी खुशियां मनाते हैं। इस दिन बच्चे नए-नए कपड़े पहनकर घर-घर में लोहड़ी मांगने जाते हैं। जिसमें उन्हें लोहड़ी के रूप में रुपये, मूंगफली, रेवड़ी और मक्के की खील मिलती है।

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ज्यादातर देखा गया है कि लोहड़ी सभी वर्गों के लोगों के लिए खास होती है, लेकिन नवविवाहित जोड़े और नवजात बच्चों के लिए यह दिन काफी स्पेशल होता है। लोहड़ी के दौरान जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ रही होती है और लोग अपने घरों के बाहर अलाव जलाकर इस आग की पूजा करते हैं। वहीं, नवविवाहित जोड़ा अपनी पहली लोहड़ी पर अपने वैवाहिक जीवन को सुखमय बनाने की कामना करता है। साथ ही घरों में सुख समृद्धि बनी रहे और घर से दरिद्रता का नाश हो लोग इसकी मनोकामना करते हैं। हालांकि इस बार इस ठंड का कहर काफी कम दिख रहा है। दरअसल लोहड़ी का यह त्योहार फसलों के पकने का भी संकेत होता है।

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इस त्योहार से वैसे कई मान्यताएं भी जुड़ी हैं। पंजाबी परिवारों में जहां इस दिन लोहड़ी मांगी जाती है, वहीं दूल्ला भट्टी वाला गीत भी गाया जाता है। कहा जाता है कि दूल्ला भट्टी वाला एक ऐसा नौजवान था जो हिंदू लड़कियों को बेचने का विरोध करता था। साथ ही उन्हें कहीं ले जाकर उनकी हिन्दू लड़कों से शादी करवा दिया करता था। इस कारण इसे हिन्दू परिवारों में भी काफी माना जाता है। हिन्दू लोग इस गीत के जरिए लोहड़ी पर उसका आभार व्यक्त करते हैं।

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वैसे इसकी एक हिन्दू परंपरा और भी है। बताया जाता है कि आज के दिन अग्नि में जो भी डाला जाता है वह सीधा पितरों तक पहुंच जाता है। इसी विश्वास को लेकर ही लोग अग्नि की पूजा करते हैं। उसमें आहुतियां डालते हैं। साथ ही पूरे परिवारवालों के साथ लोहड़ी की अग्नि की परिक्रमा करते हैं। जिसके बाद प्रसाद के रूप में रेवड़ी और मूंगफली आदि लोगों को बांटी जाती है। घर लौटते समय लोहड़ी में से दो चार दहकते कोयले भी लाने की परंपरा है। जिसे काफी शुभ माना जाता है।

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