_ap_ufes{"success":true,"siteUrl":"wahgazab.com","urls":{"Home":"http://wahgazab.com","Category":"http://wahgazab.com/category/uncategorized/","Archive":"http://wahgazab.com/2018/04/","Post":"http://wahgazab.com/you-cant-control-your-laughter-after-watching-this-video/","Page":"http://wahgazab.com/aadhaar/","Attachment":"http://wahgazab.com/you-cant-control-your-laughter-after-watching-this-video/d/","Nav_menu_item":"http://wahgazab.com/37779/","Custom_css":"http://wahgazab.com/flex-mag/","Oembed_cache":"http://wahgazab.com/73fc61f08fdcf71b6cf8325880872cf3/","Wpcf7_contact_form":"http://wahgazab.com/?post_type=wpcf7_contact_form&p=38240","Mt_pp":"http://wahgazab.com/?mt_pp=14714"}}_ap_ufee

कल्याणेश्वर महादेव मंदिर चढ़ने वाला जल हो जाता है गायब, जानें इस शिवालय के बारे में

कल्याणेश्वर महादेव मंदिर

 

 

आपने बहुत से शिवालय देखें होंगे और वहां पर जल भी चढ़ाया होगा। मगर आज हम आपको जिस शिवालय के बारे में बताने जा रहें हैं, वह अपने आप में अनोखा है। इस शिवालय की खासियत यह है कि यहां पर जब भक्त शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं तो चढ़ाया हुआ जल अचानक ही कहीं गायब हो जाता है। यह जल कहां गायब हो जाता है। इस बात का आज तक पता नहीं लग सका है। इस अनोखे शिवालय का नाम “कल्याणेश्वर महादेव मंदिर” है। यह मंदिर उत्तर प्रदेश के गढ़ मुक्तेश्वर नामक स्थान पर स्थित है।

आपको बता दें कि गढ़ मुक्तेश्वर यूपी के हापुड़ जिले का तहसील मुख्यालय है। यह शहर पावन गंगा नदी के तट पर बसा हुआ है। इसी स्थान पर मुक्तीश्वर महादेव का एक प्रसिद्ध शिवालय भी है। इस शिवालय से करीब 4 किमी पर उत्तर दिशा में कल्याणेश्वर महादेव मंदिर स्थित है। माना जाता है कि इस शहर को गढ़वाल राजाओं ने बसाया था। यह शहर कभी गढ़वाल राजाओं की राजधानी था। उस समय से कल्याणेश्वर महादेव मंदिर स्थित है तथा अपने में कई रहस्य छुपाएं हुए हैं।

कल्याणेश्वर महादेव मंदिरImage source:

आपको बता दें कि कल्याणेश्वर महादेव मंदिर में जो भी भक्त शिवलिंग पर जल चढ़ाता है। वह जल अपने आप ही भूमि में समा जाता है। यह जल भूमि में कहां जाता है। इस बारे में अभी तक कुछ पता नहीं चल पाया है। इस बारे में कई बार खोज भी की गई, पर कुछ पता नहीं लग सका। पौराणिक कथा में आता है कि एक समय राजा नल ने इस कल्याणेश्वर महादेव मंदिर के शिवलिंग पर जलाभिषेक किया था और अचानक ही जल जब भूमि में समा गया तो वे चौक गए। इसके बाद उन्होंने बड़ी मात्रा में गंगाजल मंगवा कर शिवलिंग पर वह भी भूमि में समा गया। अंत में वे भगवान शिव से क्षमा मांग कर अपने राज्य की और बढ़ गए। आपको बता दें कि इस स्थान पर छत्रपति शिवजी ने भी रूद्र यज्ञ किया था। इस प्रकार से यह मंदिर एक प्राचीन ऐतिहासिक मंदिर है। आप कभी गढ़ मुक्तेश्वर जाएं तो इस मंदिर के दर्शन करने अवश्य जाएं।

To Top