धराशायी होते धरोहर

द ग्रेट वॉल ऑफ चाइना यानी चीन की दीवार, जो दुनियाभर में मशहूर है। दुनिया के सात अजूबों में चीन की ये दीवार भी आती है, लेकिन आपको ये जान कर हैरानी होगी कि महज चीन में ही विशाल दीवार नहीं है। भारत के इतिहास को खंगाल कर देखें तो यहां भी पुरातात्विक महत्व की कई धरोहर हैं कई तो ऐसी इमारतें हैं जिनके बारे में अभी पूरी तरह से खोज भी नहीं हो पाई है…ऐसी ही एक दीवार है मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में, जिसे अगर चीन के बाद दुनिया की सबसे बड़ी दीवार कहें तो ये कहना गलत नहीं होगा। जानकारों का मानना है कि इस दीवार की लंबाई 124 किलोमीटर के लगभग थी…

धराशायी होते धरोहरImage Source: http://rnc.therednews.com/

यह दीवार जंगलों के बीच से होती हुई विन्ध्यांचल पर्वत की चोटियों को लांघती हुई नज़र आती है। यह दीवार कई टन भारी पत्थरों से बनाई गई है, बेहतरीन कारीगरी का नमूना है ये दीवार, एक पत्थर को दूसरे पत्थर से इंटरलॉकिंग पैटर्न से जोड़े गए हैं, और आज भी इनके जोड़ सुरक्षित हैं, जोड़ इतना बेजोड़ है कि दो पत्थरों के बीच दरार कहीं नज़र नहीं आती है और ना ही जोड़ों को आसानी से खोला जा सकता है। दीवार की चौड़ाई और ऊंचाई 15 से 20 फीट है। इतिहासकार मानते हैं कि इस दीवार पर खड़े हो कर घुड़सवार राज्य के सीमाओं की रखवासी करते थे। राज्य की सुरक्षा के लिहाज से बनाई गई ये दीवार तत्कालीन इंजीनियरिंग का नायाब नमूना माना जा सकता है।

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ये दीवार सुरक्षा के लिए तो थी ही इसके साथ ही इसे रास्ते के बतौर भी उपयोग किया जाता था। इतिहासकार मानते हैं कि ये दीवार परमार वंश के राजाओं द्वारा राज्य की हिफाज़त के लिए बनवाई गई थी। रायसेन के दुर्ग को भी इसकी वजह से अभेद्य किला माना जाता था, जानकार तो ये भी मानते हैं कि कालांतर में अकबर भी इस दीवार से पार नहीं पा सका था और महाराणा प्रताप सिंह को भी दीवार के आगे हार माननी पड़ी थी।

ग्रेट वॉल ऑफ इंडिया के नाम से मशहूर रायसेन की दीवार 1 हजार साल पुरानी होने का अनुमान लगाया जा रहा है। लेकिन अफसोस हमारे गैर ज़िम्मेदाराना रवैये और सरकार की उदासीनता व रखरखाव के अभाव में ये ऐतिहासिक दीवार क्षतिग्रस्त हो गई और अब ये 124 किलोमीटर से सिमट कर 84 किलोमीटर ही खोजी जा सकती है।

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