इस अजीब परम्परां में अपने ही मासूम बच्चों के दर्द पर हंसते हैं मां-बाप

बच्चों

दुनिया भर में कई अलग अलग परंपराएं जो समाजिक रुप से सही नही मानी जाती। इस तरह की परम्पराओं के मामले में भारत काफी प्रसिद्ध हैं। यहां पर ढेरों ऐसी प्रथाएं हैं जिन्हें जानने के बाद कोई भी हैरत में पड़ जाएगा। मगर भारत की ही तरह दुनिया के अन्य देशों में भी कुछ अजीबो गरीब परम्पराएं है। ऐसी ही एक अजीब परम्परा जापान की है जहां पहाड़ जैसे सूमो रैस्लर सैंकड़ो लोगों के सामने छोटे छोटे मासूम बच्चों को जोर जोर से रुलाते हैं। इसके लिए वह बच्चों को जोर जोर से यहां वहां हिल्लाते है। इतना ही नही रेस्लिंग रिंग में मौजूद रैफरी भी डरावने नकाब पैहन कर चिल्ला चिल्ला के बच्चों को डराते है। इन बच्चों को डर कर रोता देख वहां मौजूद सभी लोग ठहाके मार मार के हंसते है। आप इस परम्परां के बारे में जानकर हैरान रह गए होंगे। चलिए जानते है इस परम्परा और इसके पीछे के कारण के बारे में।

400 वर्ष पुरानी प्रथा –

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इस परंपरा के बारे में बात करें तो यह परम्परा कोई नही है बल्कि पिछले 400 सालों से चली आ रही है। बच्चों को सूमो रेस्लरों द्वारा इस प्रकार रुलाए जाने की प्रथा के पीछे का कारण बच्चे के भाग्य से जुड़ा होता है। ऐसा हम नही बल्कि इस प्रथा में विश्वास रखने वाले लोग कहते हैं। उनका मानना है कि बच्चा जितना ज्यादा जोर से रोता है उसका भाग्य उतना ही अच्छा होता है।

इस प्रथा का आयोजन जापान के सेनसोजी मंदिर में किया जाता है। इसके लिए मंदिर परिसर में एक एरिना तैयार किया जाता है। जहां दो सूमो रेस्लर छोटे छोटे बच्चों को लेकर रुलाते है। जिस समय रेस्लर बच्चों को रुलाते होते है, उस समय बच्चों के माता पिता दर्शक बन कर हंसते होते है। बच्चों को रोता देख लोग न सिर्फ हंसते हैं बल्कि तालियां भी बजाते है।

बुरी शक्तियों का नाश होता है –

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बच्चों के भाग्य के अलावा एक मान्यता यह भी है कि इस प्रथा के दौरान जब बच्चे चीखते हैं तो उनकी आवाज से बुरी शक्तियों का नाश हो जाता है। इस प्रथा की सबसे अजीब बात तो यह है कि अपने बच्चों को इस तरह से रुलाने के लिए इनके माता पिता 70 पाउंड अदा करते है।

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