चीन में फेस्टिवल के नाम पर रोज कट रहे हैं दर्जनो कुत्ते

फेस्टिवल

पिछले कुछ वर्षों से चीन साल के जून महीने में दुनिया भर के लोगों की निंदा का पात्र बनता आ रहा है। इसकी वजह है हर साल 21 जून को चीन के यूलिन शहर में होने वाला डॉग मीट फेस्टिवल। जिसमे हजारों कुत्तो को बेरहमी से मौत के घात उतारा जाता है। आपको बता दें कि इन दिनों चीन में इस फेस्टिवल की तैयारियां चल रही है। जिसके तहत बूचड़खानों में बेजुबान कुत्तों की हत्या का काम शुरु हो गया है। कुछ दिन पहले इन तैयारियों से संबंधित कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई हैं। इस तस्वीर में एक मासूम कुत्ते को जिंदा आग पर भूना जा रहा है। इसी तरह एक अन्य तस्वीर में कुत्ते को खौलते पानी में डाल करर उबाला जा रहा है। यह पढ़कर यकीनन आपका दिल भी दहल रहा होगा, मगर चीन के कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इन्हें बढ़े शौंक से खाते है। सूत्रो के मुताबिक फिलहाल इस समय हर 50 के करीब कुत्तों को मारा जा रहा है। ह्यूमन सोसायटी इंटरनेशनल ने इन बूचड़खानो की एक वीडियो भी जारी की है।

जोरदार तरीके से हो रहा है विरोध –

जोरदार तरीके से हो रहा है विरोधImage source:

वैसे आपको बता दें कि इस फेस्टिवल को लेकर बड़ी गिनती में लोगों द्वारा इसका विरोध किया जा रहा है। एनिमल एक्टिविस्ट इस विरोध प्रदर्शन में खास भूमिका निभा रहे हैं। बताया गया कि जब साल 2010 में इस फेस्टिवल की शुरुआत हुई तो उस समय महज 10 दिनों में 15 हजार कुत्तों को मौत के घाट उतार दिया गया था, लेकिन फिर जब इसका विरोध हुआ तो इसकी गिनती कम होकर 3 हजार पर पहुंच गई। कुछ देर बाद जब विरोध तेज हुआ तो खबर उड़ी की इस फेस्टिवल को बंद कर दिया गया है। मगर अब फिर से इसे शुरु कर दिया गया है और इसकी तैयारी भी शुरु हो गई है।

करोड़ों लोग डाल चुके हैं विरोध में पिटीशन –

करोड़ों लोग डाल चुके हैं विरोध में पिटीशनImage source:

इस फेस्टिवल को लेकर पब्लिक ओपिनियन जानने के लिए एक सर्वे किया गया था। जिसमे परिणाम में पता चला कि चीन के 64 प्रतिशत लोग इस फेस्टिवल को गलत बता रहे हैं। यहां तक 1 करोड़ से अधिक लोगों ने इस बंद करने के लिए पिटीशन पर साइन भी किया था। इनमे से 51 फीसदी लोगों का मानना था कि डॉग मीट का व्यापार पूरी तरह से बंद किया जाना चाहिए। इसी तरह 69 फीसदी लोगों ने बताया कि उन्होंने कभी डॉग मीट नही खाया है। मगर इस फेस्टिवल के कारण अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इसके लिए चीन की निंदा की जा रही है।

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