आजादी की आखरी रात की अनसुनी कहानी के अनसुने प्रश्न और उत्तर

भारत को आजाद हुए इस वर्ष 69 साल पूरे हो जायेंगे पर बहुत ही गिने चुने लोग इस बात को जानते हैं कि भारत की आजादी की आखरी रात यानि 15 अगस्त 1947 की रात को आखिर क्या हुआ था, आखिर क्या बात थी कि देश को आजादी अंग्रेजों ने रात 12 बजे ही दी। इस प्रकार के कुछ ऐसे अनसुने प्रश्न हैं जिस के बारे में आज का व्यक्ति नहीं जानता है इसलिए आज हम आपको इन प्रश्नों के उत्तर देने के लिए यह आलेख लिख रहें है ताकि आपको भी इस छिपे हुए सत्य का पता लग सकें तो आइये आपको ले चलते हैं 15 अगस्त 1947 की उस आखरी रात में।

गुलामी की वह आखरी रात –

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15 अगस्त 1947 की रात वह रात थी जब लोग सोए तो थे गुलाम भारत में जब वह उठे तो वह सुबह एक आजाद भारत की थी, एक स्वतंत्र भारत की सुबह। इस आखरी रात में जब भारत की स्वतंत्रता की घोषणा होनी थी उस समय किस्तान में भी जश्न मनाया गया था। देश में आजादी की सुबह आ गई थी पर देश की इस आजादी की सुबह को लेन की कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ी थी इस बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।
15 अगस्त 1947 की आधी रात को आजादी का जश्न शुरू हो गया था और इसकी शुरुआत वर्तमान संसद भवन से ही हुई थी। संसद भवन के सेंट्रल हॉल में ही भारत की आजादी का पप्रोग्राम शुरू किया गया था।

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इसी 15 अगस्त 1947 की रात को नेहरू जी ने देश को एक ऐतिहासिक भाषण दिया था और सभी को आजादी का सन्देश दिया

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लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं आजादी की इस रात को महात्मा गांधी बिल्कुल नदारद थे, न तो वे खुश थे और न ही उन्होंने तिरंगे को लहराया था, प्रश्न उठते है कि वह किस बात पर नाराज थे और वे दिल्ली में नहीं थे तो कहां थे तथा जिस आजादी के लिए उन्होंने जीवन भर लड़ाई लड़ी उसकी वे कोई खुशी क्यों नहीं मना रहें थे।

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आखिर क्यों नहीं मनाई गांधी जी ने आजादी की खुशी –

बहुत कम लोग जानते हैं कि जिस रात भारत के आजाद होने की घोषणा की गई थी उस रात को गांधी जी दिल्ली में नहीं थे और न ही उन्होंने भारत के आजाद होने की कोई खुशी मनाई थी, असल में गांधी जी उस समय कोलकाता में थे और उन्होंने तिरंगे को भी नहीं फहराया और न ही उन्होंने किसी भी प्रोग्राम में हिस्सा लिया था। इसके पीछे वजह यह थी कि 16 अगस्त 1946 को बंगाल में दंगे शुरू हो गए थे और ये दंगे धीरे-धीरे बंगाल में फैलते गए, इसके बाद एक बड़ा दर्द विभाजन का भी था। जिसमें बहुत ज्यादा लोगों को बेमौत मारा गया था। गांधी जी इन सब बातों से बहुत ज्यादा दुखी थे इसलिए वे उस रात दिल्ली में नहीं थे और 15 अगस्त को उन्होंने 24 घंटे का उपवास भी रखा था। कई नेता लोग भी गांधी जी को बुलाने के लिए उनके पास पहुंचे थे पर गांधी जी ने साफ मना कर दिया था और उन्होंने नोखाली से प्रेस विज्ञप्ति जारी करके कहा कि “मैं हिन्दुस्तान के उन करोड़ों लोगों को ये संदेश देना चाहता हूं कि ये जो तथाकथित आजादी आ रही है ये मैं नहीं लाया ये सत्ता के लालची लोग सत्ता के हस्तांतरण के चक्कर में फंस कर लाए हैं।”

रात 12 बजे ही क्यों मिली आजादी –

बहुत कम लोग जानते हैं कि भारत के अंतिम वायसराय लार्ड माउंटबेटन से भारत को आजाद करने के लिए सबसे पहले 3 जून, 1948 की तारीख चुनी थी पर एकाएक उन्होंने इस तारीख को बदल कर 15 अगस्त, 1947 की तारीख कर दी, तब भारत के ज्योतिषियों में खलबली मच गई थी। असल में भारत के ज्योतिषियों के अनुसार यह तारीख बहुत अमंगल थी इसलिए नेहरू और पटेल सहित कई बड़े नेता भी इस तारीख को बदलवाना चाहते, परंतु लार्ड माउंटबेटन अपनी बात पर अडिग थे। इसलिए भारतीय ज्योतिषियों ने यह उपाय किया कि भारत की आजादी की घोषणा आधी रात को की जाए ताकि भविष्य में भारत पर खतरा न बना रहें, यही कारण था कि भारत की आजादी की घोषणा आधी रात को ही की गई थी और नेहरू जी ने अपनी स्पीच को 12 बजे तक खत्म करके इसकी सार्वजानिक घोषणा की।

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