मुस्लिम लोगों की कांवड़ सेवा समिति 20 वर्षों से कर रही है कांवड़ यात्रियों की सेवा

कांवड़ यात्रा

 

वैसे तो कांवड़ यात्रा हिंदू धार्मिक यात्रा है, पर अब इसमें बहुत से मुस्लिम लोग भी शरीक होकर कांवड़ यात्रियों की सेवा में लग रहें हैं। आज हम आपको मुस्लिम लोगों की एक ऐसी कांवड़ सेवा समिति के बारे में यहां जानकारी दे रहें हैं जो पिछले 20 वर्षों से कांवड़ यात्रियों की देखभाल कर रही है। आपको हम बता दें कि मुस्लिम लोगों द्वारा संचालित यह कांवड़ समिति दिल्ली के जाफराबाद इलाके की है और इसका नाम “सद्भावना कांवड़ सेवा” है। इस समिति के लोग पिछले 20 वर्षों से लगातार कांवड़ यात्रियों की देखरेख में लगे हुए हैं। ये लोग सुबह साफ सफाई करने से लेकर कांवड़ यात्रियों के नाश्ते, खाने आदि का सारा ध्यान रखते हैं और दिन रात कांवड़ यात्रियों की सेवा में लगे रहते हैं।

कांवड़ यात्राImage Source: 

मुस्लिम लोगों द्वारा कांवड़ यात्रियों की सेवा के लिए किए जाने वाले इस कार्य में स्थानीय पुलिस भी अपना योगदान दे रहीं हैं। वर्तमान समय में इस इलाके में 5 कांवड़ शिविर लगे हुए हैं, जिनमें आप मुस्लिम समुदाय के लोगों को सेवा करते देख सकते हैं। सद्भावना समिति व मौनी बाबा मंदिर ब्रह्मपुरी कांवड़ सेवा समिति के अलावा युवा एकता कांवड़ सेवा समिति में भी बहुत से मुलिम समुदाय के लोग जाकर कांवड़ यात्रियों की सेवा कर रहें हैं।

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आपको बता दें कि हाल ही में दिल्ली की पूर्व मुख्य मंत्री शीला दीक्षित ने भी एक ऐसे ही कांवड़ सेवा शिविर का उद्घाटन किया, जिसमें हिंदू-मुस्लिम एकता को साफ तौर पर देखा जा सकता है। इस अवसर पर सद्भावना कांवड़ सेवा समिति के संरक्षक “चौधरी मतीन अहमद” भी मौजूद थे। शीला दीक्षित ने कहा कि इस प्रकार के शिविरों को देखकर उनको बहुत सुंदर अहसास होता है, जिनमें हिंदू मुस्लिम एकता को देखा जा सकता है। समिति के संरक्षक “चौधरी मतीन अहमद” दिल्ली विधायक भी यह चुके हैं। मतीन कहते हैं कि “1992 में जब बाबरी विध्वंस हुआ उस समय यह कांवड़ यात्रा इसलिए शुरू की गई थी, ताकि हमारे क्षेत्र में रहने वाले हिंदू समुदाय के लोगों को कोई परेशानी न हो और हिंदू-मुस्लिम भाईचारे से रह सके। वर्तमान में कांवड़ यात्रा हम लोगों के लिए एक त्योहार बन चुकी है, जिसका हमें वर्ष भर इंतजार रहता है।”, इस प्रकार से देखा जाएं तो सावन की इस कांवड़ यात्रा में बहुत से मुलिम लोग भी कांवड़ यात्रियों की सेवा में लगे हुए हैं और यह कांवड़ यात्रा वर्तमान में हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल बनी हुई है।

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