_ap_ufes{"success":true,"siteUrl":"wahgazab.com","urls":{"Home":"http://wahgazab.com","Category":"http://wahgazab.com/category/uncategorized/","Archive":"http://wahgazab.com/2018/06/","Post":"http://wahgazab.com/%e0%a4%95%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%87%e0%a4%82%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a5%87%e0%a4%a1%e0%a4%bc-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%ac/","Page":"http://wahgazab.com/aadhaar/","Attachment":"http://wahgazab.com/%e0%a4%95%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%87%e0%a4%82%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a5%87%e0%a4%a1%e0%a4%bc-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%ac/%e0%a4%87%e0%a4%b8-%e0%a4%98%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%a6%e0%a5%8c%e0%a4%b2%e0%a4%a4-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%89%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a1/","Nav_menu_item":"http://wahgazab.com/37779/","Custom_css":"http://wahgazab.com/flex-mag/","Oembed_cache":"http://wahgazab.com/705a904e083c70cef81a3db17f0d9064/","Wpcf7_contact_form":"http://wahgazab.com/?post_type=wpcf7_contact_form&p=38240","Mt_pp":"http://wahgazab.com/?mt_pp=14714"}}_ap_ufee

यहां किसी के पैदा होने पर गम और मरने पर खुशी मनाते हैं लोग

वैसे तो किसी की मृत्यु होने पर लोग दुखी होते हैं और पैदा होने पर खुशियां मनाते देखें जाते हैं पर क्या आपको पता है कि भारत में एक जनजाति ऐसी भी है जहां पर लोग किसी के पैदा होने पर गम मनाते हैं और मरने पर खुशियां। यदि नहीं, तो आज हम आपको देश की ऐसी ही एक जनजाति से रूबरू करा रहें हैं जहां यह सब प्रथाओं के रूप में किया जाता है।

banjara-tribes1Image Source:

यह जनजाति भारत के राजस्थान में निवास करती है और इस जनजाति को “सातिया जनजाति” के नाम से जाना जाता है। इस जनजाति में जब भी किसी का जन्म होता है तो इस जनजाति के लोग गम में डूब जाते हैं और दुःख प्रकट करते हैं और यदि इस जनजाति में किसी भी व्यक्ति की मृत्यु होती है तो ये लोग नए कपड़े पहनते हैं और उत्सव मनाते हैं तथा शराब और मिठाई एक दूसरे को खिला कर खुशियां मनाते हैं हालांकि समाज के हिसाब ये एकदम उल्ट है, पर भी इस जनजाति के लोग प्रथाओं के रूप में पूर्वकाल से इस परंपरा का निर्वाहन करते चले आ रहें हैं। आपको जानकारी के लिए यह भी बता दें कि सातिया जनजाति के इन लोगों का कोई भी स्थान स्थाई तौर पर नहीं होता है ये लोग अस्थाई घर बना कर कहीं भी रह लेते हैं, वर्तमान में इस जनजाति में मात्र 24 परिवार ही रह गए हैं जो की राजस्थान में अलग-अलग जगह में फैले हुए हैं।

To Top